परीक्षाएं जीवन का अंत नहीं, निराश न हों, आगे बढ़े, हार के बाद सफलता तय

सिविल सर्विसेज के परिणाम में ऑल इंडिया में 10 वीं रैंक हासिल करने वाले अभिषेक सुराणा पत्रिका कार्यालय में

By: tej narayan

Published: 24 May 2018, 01:17 PM IST

भीलवाड़ा।

'' देखिए, मेरा सफर काफी लंबा रहा है। अक्सर कई स्टूडेंट 12 साल की उम्र में कॅरियर तय करते हैं, लेकिन मैने 24 साल की उम्र में असली कॅरियर शुरू किया। वर्ष 2012 में स्नातक करने के बाद नौकरी की। इसके बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी में लगा। यह मेरा अपने कॅरियर को बेहतर बनाने की दिशा में चौथा कदम था। मैने 2016 में सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी तो इसमें मेरी 250 वीं रैंक आई।

 

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मुझे आईपीएस मिला। पश्चिम बंगाल कैडर मिलने के बाद हैदराबाद में मेरी ट्रेनिंग चल रही थी। अगले साल फिर मैने सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी और मुझे ऑल इंडिया 10 वीं रैंक मिली। आईपीएस की ट्रेनिंग में जाने से पहले मुख्य परीक्षा दी थी। आईपीएस की ट्रेनिंग काफी मुश्किल होती है। इसमें एक-डेढ़ माह तक केवल व्यक्तित्व विकास के बारे में ही क्लासेज लगती है।

 

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बच्चों पर प्रेशर बिल्कुल नहीं डालें

मुझे एेसा लगता है कि विद्यार्थियों में अब धैर्य की कमी होने लगी है। वे चाहते हैं कि तुरंत सफलता मिले। एेसे में अभिभावकों का दबाव भी बहुत रहता है। मैं लगातार देखता हूं कि आए दिन विद्यार्थी परीक्षाओं में असफल रहने पर आत्महत्या कर लेते हैं। एेसे में मन बहुत दुखी होता है। मैं अभिभावकों से कहना चाहता हूं कि वे बच्चों पर बिल्कुल भी प्रेशर नहीं डाले।

उन्हें आजादी भी दीजिए और कंट्रोल भी रखिए। बच्चों से यही कहना चाहता हूं कि परीक्षा कोई जीवन का अंत नहीं है। जीवन बहुत बड़ा है। कोई एक परीक्षा आपके जीवन का निर्णय नहीं कर सकती है। इसलिए टेस्ट में या कभी कम माक्र्स आने पर आत्महत्या का विचार मन में नहीं लाए। एक एेसा फ्रेंड्स सर्किल बनाए जो सकारात्मक हो। निगेटिव के साथ रहोगे तो कहेंगे आप अच्छा नहीं कर रहे हैं, या वे बहुत अच्छा कर रहा हैं। हमेशा सकारात्मक लोगों के साथ ज्यादा रहिए। आत्महत्या तो हार मानने वाली बात हो गई।


हार के आगे ही जीत है

किसी में प्रतिभा है तो उसे रुकने की जरुरत नहीं है। क्योंकि हार के आगे ही जीत है।जिस क्षेत्र में आपकी रुचि है पहले उसमें प्रयास कीजिए। आप एक अच्छे आर्टिस्ट, जर्नलिस्ट, फोटोग्राफर, इंजीनियर, सेफ भी बन सकते हैं। यदि आपका मन सिविल सर्विसेज में जाना चाहता हैं तो आप में समाज की समझ होनी चाहिए। मैने जेईई भी दिया है और आईएएस की परीक्षा भी पास किया है। आज मेरे कई दोस्त एेसे है, जिन्होंने मेरे साथ जेईई दिया था, लेकिन वे सफल नहीं हुए। लेकिन आज वे जहां भी हैं, मुझसे भी ज्यादा खुश है।


राजस्थान के युवा आगे

पहले एक ट्रेंड था कि सिविल सर्विसेज में यूपी-बिहार का दबदबा था। अब ट्रेंड बदला है। इस बार करीब 85या 90 लोग राजस्थान के एक हजार में सलेक्ट हुए है। पिछली बार भी बड़ी संख्या में राजस्थान के युवाओं ने बाजी मारी थी। देश के विभिन्न राज्यों में राजस्थान मूल के आईएएस और आईपीएस सेवाएं दे रहे है।
(सिविल सर्विसेज के परिणाम में राजस्थान में प्रथम और ऑल इंडिया में 10 वीं रैंक हासिल करने वाले अभिषेक सुराणा ने राजस्थान पत्रिका ऑफिस में आकर अखबार की कार्यप्रणाली को देखा। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणाम के मद्देनजर पत्रिका के आग्रह पर उन्होंने युवाओं केलिए यह कॉलम लिखा)

मुझे याद है जब 2007 में १२वीं का रिजल्ट आया था, तब मैं 11 साल पहले राजस्थान पत्रिका कार्यालय में आया था। उस वक्त मुझसे पूछा गया था कि भविष्य में क्या बनना चाहते हो तो मैने कहा, आईएएस बनूंगा। पत्रिका को थैंक्स की आज इतने सालों बाद आईएएस बनकर वापस उसी जगह आया हूं। इसलिए यह बहुत लंबा सफर है। मैं तो यह कहना चाहता हूं कि आप हमेशा अखबार पढि़ए। उसमें भी संपादकीय पेज को पढऩे की आदत डालिए। इसमें किन इश्यूज पर क्या लिखा गया है या क्या बात हो रही है।

इस पर आप खुद पढ़कर मंथन करिए। मैं समझता हूं कि इतना करने के बाद सफलता तय है। मैं राजस्थान पत्रिका को धन्यवाद देना चाहता हूं कि हर वक्त मुझे आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। स्कूल समय में सुबह रोजाना अखबार पढ़ता था। फिर जब सिविल सर्विसेज के लिए तैयारी की तो इसमें भी राजस्थान पत्रिका ही पढ़ा। मुझे काफी सहयोग मिला। पत्रिका की विश्वसनीयता और जो शुद्ध हिंदी है इसका मुझे फायदा मिला। इसके लिए भी पत्रिका का आभार।

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