अटका था 3000 टन कपड़ा
भीलवाड़ा।
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने को ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबन्ध बुधवार को हटा दिया गया। इससे भीलवाड़ा के कपड़ा व ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को बड़ी राहत मिली। हालांकि कई ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों के गोदाम उत्तरप्रदेश बोर्डर पर होने से उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं थी, लेकिन व्यापारियों का कपड़ा दिल्ली के गांधीनगर नहीं पहुंच रहा था। इससे वे परेशान थे।
भीलवाड़ा गुड्स एवं ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वबन्धु सिंह राठौड ने बताया कि कई दिन से भीलवाड़ा से गए ट्रक दिल्ली से बाहर रोके जा रहे थे। इससे वहां जाम के हालात हो गए। पहले यह आदेश 26 नवम्बर तक के थे लेकिन लगातार ट्रकों के दबाव के चलते सरकार ने बुधवार को ट्रकों को अंदर जाने की अनुमति दे दी। हालांकि स्थिति सामान्य होने में दो से तीन दिन लगेंगे।
चालक व खलासी सर्दी में परेशान
राठौड़ ने बताया कि भीलवाड़ा से वाहन चालक के दिल्ली बोर्डर पर फसंने से चालक व खलासी खासे परेशान थे। वहां सर्दी अधिक होने से हालात और ज्यादा खराब हो रही थी। कुछ ट्रक या वाहन चालक तो अन्य रास्ते से दिल्ली पहुंचकर माल खाली करने में जुटे थे। बताया गया कि दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली में गैर-जरूरी सामान ले जाने वाले ट्रकों पर प्रतिबंध लगाया था।
लाखों मीटर कपड़ा जाता दिल्ली
उद्यमी रमेश अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली के गांधीनगर बाजार छोटे ग्राहकों से बड़े ग्राहक, व्यापारियों के रोजगार और व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है। एशिया का यह सबसे बड़ा ऐसा मार्केट है जो मौसम के अनुसार रंग बदलता है। गर्मी के दिनों में सूती व हल्के कपड़ों का केंद्र बन जाता है। यहां प्रतिदिन १०० से २०० करोड़ का कारोबार होता है। यहां से प्रतिदिन लाखों मीटर कपड़ा दिल्ली जाता है। इनमें सबसे ज्यादा डेनिम के रोल जाते है। दिल्ली के गांधीनगर क्षेत्र रेडिमेड गारमेन्ट का बड़ा हब है। दिल्ली से जुड़े उत्तरप्रदेश, बिहार तथा हरियाणा, पंजाब जुड़ा होने से इन राज्यों के व्यापारी भी यहीं से कपड़ा खरीदते है। मारवाड़ी में बड़ी संख्या में वहा व्यापार करते है। कई व्यापारी केवल डेनिम का रोल लेकर रेडीमेड कपड़ा बनाते है। डिजाइनर कपड़ें को बना कर बेचते है। दूसरे ट्रेडिंग का काम करने वाले है।
प्रतिदिन २५ ट्रक व दो दर्जन बसों में ज्याता कपड़ा
कपड़ा व्यापारी ने बताया कि भीलवाड़ा प्रतिदिन २५ ट्रकों व दो दर्जन से अधिक ट्रावेल्स बसों से कपड़े की गांठें व डेनिम का कपड़ा जाता है। इसमें लाखों मीटर कपड़ा होता है। लेकिन पिछले एक सप्ताह से रोक के चलते एक भी गांठ दिल्ली नहीं पहुंच पाई है। इससे ट्रांसपोर्ट के गोदामों में कपड़े की गांठे भरी पड़ी है। इससे कपड़ा व्यापारियों को परेशानी हो रही थी।