समस्या नहीं, समाधान बनेगा गंदा पानी सीवरेज से जुड़ने के बाद 80 प्रतिशत पानी का फिर होगा इस्तेमाल
भीलवाड़ा . घरों से निकलने वाला गंदा पानी अब समस्या नहीं बल्कि समाधान बनेगा। इस पानी का इस्तेमाल न केवल खेती-बाड़ी बल्कि फैक्टि्रयों व उद्योग धंधों में भी किया जा सकेगा। आरयूआईडीपी ने गंदे पानी को शुद्ध कर फिर इस्तेमाल की तैयारी अपने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में शुरू की। कुछ ही माह में प्लांट तक पहुंचने वाला घरों का पानी फिर उपयोग में लाया जा सकेगा। सीवरेज से जुड़ने के बाद 80 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल फिर हो सकेगा।
भीलवाड़ा शहर में कुवाड़ा रोड पर कोठारी नदी िस्थत 50 करोड़ की लागत से 30 एमएलडी क्षमता का एसटीपी है। अभी यहां आसपास के घरों से करीब 2 एमएलडी गंदा पानी पहुंच रहा है। प्लांट में घरों के गंदे पानी को ट्रीट करने की मशीनरी लगी है। इसका संचालन व रखरखाव आरयूआईडीपी कर रही है। एसटीपी में एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार क्योरिनेटर मय टोनर रूम व क्लोरीन कोन्टेक्ट टैंक निर्माण किया गया है। मालूम हो, भीलवाड़ा शहर में 410 किलोमीटर की सीवर लाइन बिछाई जानी है। इसमें केवल 1.1 किमी लाइन का काम बचा है।
नालियों से मिलेगा छुटकारा
सीवरेज लाइन से घर-घर कनेक्शन का काम पूरा होने के बाद नालियों में पानी नजर नहीं आएगा। घरों का पानी सीवरेज से प्लांट पहुंचेगा। नालियों में केवल बरसात का पानी ही नजर आएगा। मालूम हो, नालियों के रखरखाव व निर्माण पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, जो इसके बाद बंद हो जाएंगे।
दो हजार कनेक्शन हुए
शहर में अगले साल तक करीब 47,550 सीवरेज कनेक्शन होने हैं। अब तक दो हजार कनेक्शन हो चुके हैं। इन घरों को सीवरेज लाइन से जोड़ा गया। इसका पानी सीधा एसटीपी तक जाने लगा है, जहां ट्रायल रन किया जा रहा है। शहर के सभी कनेक्शन जुड़ने के बाद ट्रीटेड पानी उद्योग व सिंचाई में काम आएगा।
उद्योगों में मांग
भीलवाड़ा की सीवरेज का ट्रीटेड पानी काम में लेने के लिए हिन्दुस्तान जिंक और संगम ग्रप ने आरयूआईडीपी व नगर परिषद भीलवाड़ा को पत्र लिखा है। वे ट्रीटेड पानी इस्तेमाल करना चाहते हैं। इनके अलावा यहां के प्रोसेस हाउस भी यह पानी काम में लेने को तैयार है। जिन्दल ग्रुप भी यह पानी काम में लेगा।
यह मिलेगा फायदा
आरयूआईडीपी के महत्वाकांक्षी सीवर प्रोजेक्ट के पूरा होने पर नालियों में गंदे पानी से निजात मिलेगी। गांधीसागर, धान्धोलाई व कोठारी नदी में गिरने वाले गंदे पानी से भी निजात मिलेगी। इससे स्थानीय निकायों का नाली निर्माण पर करोड़ों रुपए बचेगा। उपचारित पानी के उपयोग से निकायों को करोड़ों रुपए की आमदनी होगी। मकानों में सीलन की समस्या दूर होगी। 3 करोड़ लीटर प्रतिदिन पानी को उपचारित कर औद्योगिक एवं अन्य उपयोगों के लिए तैयार किया जा सकेगा।
अंतिम चरण में सीवरेज का काम
जिन्दल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निकट ही आरयूआईडीपी का 30 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य पूरा हो चुका है। सीवर लाइन का कार्य अन्तिम दौर में है। अभी सूचना केन्द्र से एमजीएच मुख्य गेट, समेत अन्य छोटे टुकड़े बचे हैं। हालांकि यह काम देरी से होने पर भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अपनी गति से चलेगा। शहर भर से घरों से निकलने वाला गंदा पानी नालियों की अपेक्षा सीवर लाइन से ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचेगा। उसे ट्रीट कर फिर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
सूर्यप्रकाश संचेती, अधीक्षण अभियन्ता आरयूआईडीपी
फैक्ट फाइल
3 करोड़ लीटर पानी का रोजाना होगा उपचार
2 हजार घर सीवरेज से अब तक जुड़ चुके
30 एमएलडी क्षमता का प्लांट कर रहा पानी साफ