
Now, registering property from the comfort of your home will become even more 'expensive'.
प्रदेश में घर बैठे प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने के शौकीनों की जेब अब और ढीली होगी। राज्य सरकार ने ई-पंजीयन पोर्टल के माध्यम से मिलने वाली 'डोर-स्टेप' रजिस्ट्री सुविधा के शुल्क में भारी इजाफा कर दिया है। वित्त विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना के अनुसार, सुविधा शुल्क में 4 से लेकर 20 गुना तक की बढा़ेत्तरी की गई है। जहां पहले इस सुविधा के लिए महज एक हजार रुपए अतिरिक्त देने पड़ते थे, वहीं अब आवेदकों को क्षेत्र के अनुसार मोटी रकम चुकानी होगी।
सरकार ने अब इस सुविधा को तीन अलग-अलग भौगोलिक श्रेणियों में बांट दिया है।
सरकार ने केवल रजिस्ट्री ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी अन्य डिजिटल सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव किया है। डॉक्यूमेंट डाउनलोड में अब 100 रुपए की जगह 200 रुपए लगेंगे। दस्तावेज सर्च या निरीक्षण पर 50 रुपए की जगह अब 100 रुपए शुल्क देना होगा। स्कैनिंग चार्ज में पूर्व में निर्धारित 300 रुपए को बढ़ाकर अब 500 रुपए कर दिया गया है।
पंजीयन विभाग ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कुछ वर्गों को इस बढ़ी हुई फीस से मुक्त रखा है। इनमें दिव्यांगजन, शारीरिक रूप से असमर्थ व्यक्ति और जेल में निरुद्ध कैदी अभी भी पुराने शुल्क 1000 रुपए पर ही इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इसके लिए उन्हें आवश्यक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे।
ई-पंजीयन पोर्टल पर आवेदक को ऑनलाइन आवेदन के दौरान 'विजिट एट रेजिडेंस' का विकल्प चुनना होता है। ऑनलाइन फीस जमा होने के बाद एक टाइम स्लॉट आवंटित किया जाता है। तय समय पर रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मचारी बायोमेट्रिक मशीन और जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदक के घर या बताए गए स्थान पर पहुंचकर पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करते हैं। अनिल अजमेरा का कहना है कि सरकार का यह कदम राजस्व बढ़ाने की दिशा में बड़ा प्रयास है, लेकिन मध्यवर्गीय परिवारों के लिए यह सुविधा अब विलासिता जैसी हो जाएगी। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सेवाओं को सुलभ और सस्ता करने पर जोर है, वहां 20 गुना तक की बढ़ोतरी चौकाने वाली है।
Published on:
28 Dec 2025 09:49 am
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