
Now there will be zero tolerance for expired milk in schools.
राज्य सरकार ने मिड डे मील योजना के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले दूध को लेकर अब जीरो टॉलरेंस नीति लागू कर दी है। किसी भी स्कूल में एक्सपायरी, मिलावटी या घटिया गुणवत्ता का दूध मिलने पर सीधे एफआईआर, सप्लायर की ब्लैकलिस्टिंग और अनुबंध निरस्त करने की कार्रवाई होगी। आयुक्तालय, मिड डे मील योजना ने जिलों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब हर खेप के दूध की मात्रा, गुणवत्ता और पैकिंग की मौके पर जांच अनिवार्य होगी। संदेह की स्थिति में दूध का लैब टेस्ट कराया जाएगा और रिपोर्ट आने तक वितरण रोका जाएगा।
परिपत्र में पहली बार यह स्पष्ट कर दिया गया है कि लापरवाही पाए जाने पर सिर्फ सप्लायर ही नहीं, बल्कि स्कूल स्तर तक जिम्मेदारी तय की जाएगी। निगरानी बैठकों में दूध की गुणवत्ता की मासिक समीक्षा होगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही को अनुशासनात्मक अपराध माना जाएगा।
हाल के महीनों में कई जिलों से दूध की खराब गुणवत्ता, बदबू, फटने और कम मात्रा की शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने यह बड़ा फैसला लेते हुए पूरे तंत्र को सख्त निगरानी में ला दिया है।
आयुक्त विश्व मोहन शर्मा ने साफ किया है कि मिड डे मील सिर्फ भोजन नहीं, बच्चों के पोषण और भविष्य से जुड़ी योजना है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की अनियमितता आपराधिक श्रेणी में मानी जाएगी।
Published on:
03 Jan 2026 08:41 am
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