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उत्तम शौच धर्म अपनाने वाला ही होता है सुखी : शास्त्री

- दस लक्षण पर्व पर प्रवचन, मंदिर में हुआ भव्य अभिषेक

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Only the one who follows the best cleanliness religion is happy: Shastri

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जीवन में जो मिला है, उसे पर्याप्त मानकर संतोष करने वाला व्यक्ति ही वास्तव में सुखी रहता है। लाभ की इच्छा करना बुरा नहीं, लेकिन लोभ करना हमेशा दुख का कारण बनता है। इंसान पूरी जिंदगी दौलत के पीछे भागकर दम तोड़ देता है, लेकिन उसकी आकांक्षाएं कभी समाप्त नहीं होतीं। परिग्रह की एक सीमा तय करनी चाहिए। यह विचार पंडित राहुल जैन शास्त्री ने रविवार को आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दस लक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि धन प्राप्ति के बाद दान करना आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सागर अपना पानी नहीं छोड़ता इसलिए खारा है, जबकि कुआँ अपना पानी देता रहता है इसलिए मीठा है। इंसान को भी दान देकर जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।

आदिनाथ भगवान का स्वर्ण मुकुट से अभिषेक

आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि रविवार को भागचंद अभिषेक छाबड़ा ने स्वर्ण मुकुट धारण कर आदिनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक व 108 रिद्धि मंत्रों के साथ शांतिधारा की। भागचंद मुकेश कासलीवाल, राजकुमार अजित अग्रवाल, संजय झांझरी, सनत अजमेरा, ओमचंद रिखबचंद, धनराज टोंगिया, मांगीलाल राजेश बड़जात्या आदि श्रद्धालुओं ने अन्य प्रतिमाओं पर शांतिधारा की। शाम को भक्ताम्बर की आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्ति नृत्य और भजनों के साथ आरती हुई।

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