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काश्तकारों ने उद्योग लगाने दी जमीन, 17 साल बाद मिली हक की भूमि

न झगड़ा न विवाद सिर्फ वार्ता से निकाला समाधान

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काश्तकारों ने उद्योग लगाने दी जमीन, 17 साल बाद मिली हक की भूमि

काश्तकारों ने उद्योग लगाने दी जमीन, 17 साल बाद मिली हक की भूमि


भिवाड़ी. एक साल, दो साल... दस साल और आखिरकार 17 साल बीत गए। इतना सब्र और धैर्य रखा टपूकड़ा औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए भूमि देने वाले काश्तकारों ने और एक मिशाल पेश कर दी। थोड़ी गड़बड़ी पर उतावले होने वालों को भी एक सबक दे दिया। काश्तकारों को करीब दो दशक के लंबे इंतजार के बाद उनका हक वापस मिला। लेकिन उन्होंने इसके लिए कोर्ट कचहरी का रास्ता नहीं अपनाया। रीको अधिकारियों से सिर्फ वार्ता का ही माध्यम रखा। इतने सालों में सैकड़ों बार रीको के भिवाड़ी कार्यालय और जयपुर के चक्कर भी लगाए लेकिन कभी कोई विवाद नहीं होने दिया। इतने लंबे इंतजार के बाद जब उन्हें उनका हक मिला तो खुशी से भी झूम उठे। इस प्रसंग में काश्तकारों ने एक मिशाल पेश की है। जिसकी रीको के अधिकारी भी प्रशंसा कर रहे हैं।
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ऐसे चला घटनाक्रम
रीको ने वर्ष 2007 में टपूकड़ा औद्योगिक क्षेत्र में जमीन का अधिग्रहण किया। एक बड़ी वाहन निर्माता कंपनी को उद्योग लगाने जमीन दी गई। रीको ने यहां करीब 700 एकड़ भूमि अधिग्रहण किया। जिन काश्तकारों ने जमीन दी, उसमें से 10 काश्तकार ऐसे थे जिसमें से 10 ने नगद मुआवजा लिया और चार ने 50 प्रतिशत विकसित भूमि की मांग रखी। रीको ने इन चार काश्तकारों को कारोली आवासीय क्षेत्र में भूमि उसी समय आवंटित कर पंजीयन भी कर दिया। लेकिन इस भूमि में कोई विवाद निकल आया। जिससे काश्तकारों की आवंटन संबंधी प्रक्रिया अधूरी रह गई। रीको इस विवाद को सुलझाता रहा। लेकिन चार काश्तकारों को उनकी जमीन के बदले विकसित भूमि नहीं मिल सकी। तभी से ये काश्तकार दूसरी जगह विकसित भूमि देने के लिए रीको से मांग कर रहे थे। सैकड़ों बार आकर रीको अधिकारियों से मिले। तब से लेकर अब तक बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारियों के भी तबादले हो गए। लेकिन काश्तकार धैर्य के साथ अपने हक की बात अधिकारियों को बताते रहे। अब रीको ने चारों काश्तकार को खुशखेड़ा थाने के पीछे जमीन आवंटित की है। इतनी लंबी अवधि के बाद काश्तकारों को जमीन मिलने से उन्हें अपने सब्र का मीठा फल मिला है। चारों काश्तकार को 4700 वर्गमीटर आवासीय भूमि आवंटित की गई है।
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इस दौरान जमीन के भाव आसमान में
जमीन अधिग्रहण के समय क्षेत्र में भाव काफी कम थे। अब भाव आसमान में पहुंच चुके हैं। तब वहां निवेशक भी नहीं पहुंच रहे थे, अब कतार लगाकर खड़े हैं। खुशखेड़ा में विकसित आवासीय भूमि के भाव 20 से 25 हजार रुपए वर्गमीटर हैं। काश्तकारों को भले ही वर्षों का इंतजार करना पड़ा है, लेकिन जब उनका हक मिला तो खजाना हाथ लग गया।
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इस मामले को मुख्यालय के दिशा निर्देश पर सुलझाकर काश्तकारों को अधिग्रहित भूमि के बदले विकसित भूमि लॉटरी से आवंटित की गई है।
शिवकुमार, रीको, यूनिट हेड

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