
भूरूपांतरण करने और नियम तोडऩे, हर जगह मिली छूट
भिवाड़ी. बीडा में गत वर्ष भूरूपांतरण की दर्जनों फाइल दबाने और जानकारी नहीं देने पर पत्रिका ने सातवें दिन पड़ताल की। 90ए की फाइल प्रक्रिया संबंधी जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों से बात की, जिसमें निकलकर सामने आया कि फाइल दबाने और जानकारी नहीं देने में अधिकारियों ने अपना हित समझा क्योंकि मामला जितना दबेगा उतना ही अच्छा रहेगा और जितना खुलेगा उतना ही नुकसान देगा। क्योंकि जो भी 90ए हुई हैं, उनमें बाद में क्या हुआ है, किस तरह लेआउट का उल्लंघन कर भूखंड का बेचान किया गया है, पार्क, हरियाली सहित अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए दर्शाए गए स्थान को भी भूखंड स्वरूप बेचकर मुनाफा कमाया गया है। इस तरह 90ए करने और 90ए होने के बाद अधिकारियों ने आंखें बंद कर ली। माफिया से मिलीभगत कर सिर्फ एक ही फॉर्मूले पर काम किया कि जल्द से जल्द 90ए कर दी जाए जिससे कि आमजन को भूरूपांतरण दिखाकर त्वरित गति से महंगे दामों में भूखंड का बेचान कर मोटा मुनाफा कमाया जा सके।
रीको अधिकारियों ने खोदे गड्डे
कारोली में रीको औद्योगिक क्षेत्र से लगी जिस भूमि पर 90ए कर भूखंड बेचे गए हैं, वहां पर तत्कालीन रीको अधिकारियों ने जाकर कार्रवाई भी की थी। औद्योगिक क्षेत्र में रीको की सडक़ थी, उससे आगे तिराहे से होकर निजी भूमि तक सडक़ निर्मित की गई थी, जिससे सडक़ की एकरूपता आ जाए। उक्त तिराहे पर रीको अधिकारी ने जाकर गड्डे खुदवा दिए थे। बाद में राजनीतिक दबाव की वजह से मामला दब गया।
टीमवर्क का परिणाम
बीडा में गत वर्ष भूरूपांतरण की फाइल जितनी तेजी से दौड़ी, यह देखकर विभागीय अधिकारी और अन्य जानकार भी दंग रह गए। लेकिन इस तेजी की असल वजह अब निकलकर सामने आ रही है। पूरी प्रक्रिया पर विभाग के अंदर और बाहर के कुछ लोगों ने कब्जा जमा रखा था। चुनिंदा लोगों ने ही अहम फैसले लिए, कैप्टन के निर्देशन में पूरी टीम ने एकजुटता से काम किया और सारी फाइल तेजी से निपटाई।
Updated on:
29 Jan 2026 07:18 pm
Published on:
29 Jan 2026 07:18 pm
