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बीडा में 90ए की जानकारी देने से क्यों डरते हैं अधिकारी

भिवाड़ी. बीडा में गत वर्ष भूरूपांतरण की दर्जनों फाइल लगाई गई और उन्हें व्यावसायिक, आवासीय और औद्योगिक भूमि के स्वरूप में बदला गया, अब 90ए की प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका उठने लगी है क्योंकि बीडा अधिकारी 90ए की फाइल संबंधी जानकारी देने से बच रहे हैं! सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत बीडा से […]

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भिवाड़ी. बीडा में गत वर्ष भूरूपांतरण की दर्जनों फाइल लगाई गई और उन्हें व्यावसायिक, आवासीय और औद्योगिक भूमि के स्वरूप में बदला गया, अब 90ए की प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका उठने लगी है क्योंकि बीडा अधिकारी 90ए की फाइल संबंधी जानकारी देने से बच रहे हैं! सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत बीडा से एक जनवरी से 20 नवंबर 2025 तक 90ए की जानकारी मांगी गई। जबाव में बीडा अधिकारियों ने बताया कि सूचना तृतीय पक्षकार से संबंधित है इसलिए जानकारी नहीं दी जा सकती। इसके बाद अपील लगाई गई, जिसमें बीडा अधिकारियों ने अजब-गजब तर्क दे डाले।

अपील पर ये दिए मनमर्जी के जबाव
अपील पर बीडा अधिकारियों ने नियम कायदों को छोडक़र आरटीआई में अपने स्व विवेक का ज्यादा उपयोग किया है। बीडा अधिकारियों ने बताया कि अपीलार्थी ने किसी एक पत्रावली की प्रति नहीं मांगी है। इसका मतलब हुआ कि सूचना के अधिकार में क्या जानकारी मांगी जानी चाहिए, ये भी बीडा अधिकारी तय करेंगे। तृतीय पक्ष की सहमति नहीं होने का हवाला दिया है। जबकि बीडा अधिकारियों ने तृतीय पक्ष से कोई पत्राचार ही नहीं किया है, तृतीय पक्ष को ढाल बनाकर सूचना देने से मना कर दिया है। 90ए की पत्रावलियों की संख्या अत्यधिक होना बताया है, जिसके लिए संसाधन की कमी का बहाना बनाया है। कहा है कि प्रत्येक आवेदक से सहमति लिया जाना संभव नहीं है। जो विभाग प्रति वर्ष करोड़ों रुपए के टेंडर लगाता है, अधिकारियों की बैठक करने में चाय पानी नाश्ता का प्रबंधन करने में ही लाखों रुपए का टेंडर करते हैं, उन्होंने सूचना की प्रतिलिपि देने में संसाधनों की कमी का बहाना बनाया है इसमें भी आश्चर्य होता है। बीडा ने तृतीय पक्षकारों को अधिक संख्या में बताया है, उनसे सहमति लिया जाना वर्ततान परिप्रेक्ष्य में व्यवहारिक नहीं बताया है, इस तरह बीडा अधिकारी भी मानते हैं कि 90ए की संख्या खूब है। वर्तमान में ऐसा क्या कारण है कि तृतीय पक्षकार से सहमति नहीं ली जा सकती, इसका कोई उल्लेख नहीं किया है, बीडा अधिकारी ये क्यों चाहते हैं कि जो उनके मन में है, वही जानकारी आरटीआई में ली जाए।

आखिर क्या छिपाना चाहते हैं
बीडा में 90ए की फाइल गत वर्ष तेजी से दौड़ीं। इसमें एक साहब ने अपने कार्यकाल के दौरान आमजन का हित करने का प्रयास किया, अपनी छवि को आमजन में बेहतर बनाने की कोशिश की, जबकि अधीनस्थों ने मिलकर मामला बिठा दिया। साहब की भलाई का फायदा उठा लिया। साहब की सकारात्मक सोच, तेजी से फाइल निपटाने की आदत का उन्होंने अपनी तरह उपयोग कर डाला। कई बीघा कृषि भूमि जो कि एससी समुदाय के नाम से पंजीकृत थी। इसमें बड़े भूमाफिया शामिल हुए और भूरूपांतरण कराकर लाखों की जमीन करोड़ों की बनाकर बेच डाली। 90ए के लिए जमीन की मात्रा के हिसाब से भी मामला तय हुआ। इसमें विभागीय मिलीभगत थी। कई जगह सिर्फ 90ए हुई और बिना लेआउट स्वीकृत कराए ही भूखंड काटकर बेच डाले।

विभागीय शाखाओं को भी नहीं दी जानकारी
आरटीआई लगने के बाद सूचना का जबाव देने के लिए विभाग की आरटीआई शाखा ने नियमन शाखा से जानकारी मांगी। नियमन शाखा ने तुरंत कह दिया कि जानकारी तृतीय पक्ष से संबंधित है। आरटीआई शाखा ने कहा कि तृतीय पक्षकार का नाम पता भेजा जाए, जिससे कि उन्हें पत्र लिखकर, उनकी सहमति असहमति प्राप्त की जाए, जिम्मेदार शाखा ने इसका कोई जबाव हीं नहीं दिया। मामला फंसते देख चुप्पी साध ली। आखिरकार 90ए में ऐसा क्या घपला हुआ कि बीडा अधिकारियों ने अपने अन्य अधिकारियों को भी यह जानकारी साझा नहीं की।