
चिंदी चोरों पर पुलिस का बस नहीं है
भिवाड़ी. औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में चिंदी चोरों पर पुलिस का बस नहीं है। पुलिस इन बदमाशों के इरादे भी नहीं समझ पा रही। चेन स्नेचिंग, मोबाइल छीना-झपट्टी, बड़ी चोरी, लूट, डकैती, मारपीट जैसी वारदातों को अंजाम देने वालों की राह आसान करने के लिए इन चिंदी चोरों की नजर सडक़ों के किनारे व डिवाइडरों के बीच खंभों पर लगी रोड लाइट पर रहती है और मौका मिलते ही चोरी करने से नहीं चूक रहे। जिससे छाए रहने वाले अंधेरे का फायदा बड़ी वारदात करने वालों को मिल जाता है। चोरी हुई लाइट की जगह दूसरी नहीं लगाने में संबंधित निजी एजेंसी अपनी जिम्मेदारी से बच रही है और नोडल एजेंसी नगर परिषद संबंधित एजेंसी पर जुर्माना लगाकर अंतिम बिल में से समायोजित करने का दावा कर रही है।
परिषद सूत्रों के अनुसार अभी तक चोरी गई लाइट नहीं लगाने पर निजी कंपनी पर 20 लाख से अधिक जुर्माना लगाया जा चुका है। शहर के कुछ हिस्सों में रात को सडक़ों पर अंधेरा छाया रहता है। इसके पीछे कारण कुछ स्थानों पर तो खंभों की स्ट्रीट लाइट खराब होना है, जबकि कुछ से चोरी गई स्ट्रीट लाइट जगह फिर से नहीं लगाना परेशानी बनी हुई है। हालात यह है कि चोरी गई लाइट की जगह दूसरी लाइट तीन से चार साल बाद भी नहीं लगाई गई। बीते चार वर्ष में नगर परिषद क्षेत्र की सडक़ों पर लगाई गई करीब 300 स्ट्रीट लाइट चोरी हुई है।
यहां से चुराई स्ट्रीट लाइट
हेतराम चौक से शनि चौक तक दो, यूआईटी सेक्टर सात में 13, मंशा चौक से यूआईटी पुलिस थाने तक तीन, गौरव पथ से कंटेपर डिपो तक एक, परशुराम चौक पर तीन, यूआईटी सेक्टर पांच मार्केट में दो, यूआईटी सेक्टर सात में नौ, हेतराम चौक से कैप्टन चौक तक छह, यूआईटी सेक्टर चार में 10 स्ट्रीट लाइट चोरी हुई है। इसी तरह रैन बसेरा आलमपुर में चार, बस स्टैंड के बाहर एक, गोधान परिक्रमा मार्ग पर सात, भगतसिंह कॉलोनी बी ब्लॉक और आरटीओ ऑफिस रोड पर 11, मिलकपुर ढाणी में छह, मिलकपुर में तीन, यूआईटी सेक्टर तीन में तीन, खिजूरीबास में दो, अलवर बायपास दो, मंशा चौक से खिजूरीबास तक चार, कंटेनर डिपो से कॉलेज तक छह, खिदरपुर में पांच, मंशा चौक से भिवाड़ी मोड़ तक 10, वसुंधरा नगर में छह, जगन्नाथ मंदिर के पास से दो सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों से अब तक करीब 300 स्ट्रीट लाइट चोरी हो चुकी है। जहां कंपनी की ओर से नई लाइट नहीं लगाई गई। जिसकी वजह से अंधेरा रहता है।
यह होती है लागत
नगर परिषद की ओर से सडक़ों पर 18 से 190 वॉट क्षमता की स्ट्रीट लाइट लगाई जाती है। 18 वॉट की एक लाइट 1292 रुपए, 35 वॉट की एक लाइट 1886 रुपए, 70 वॉट की एक लाइट 3021 रुपए, 110 वॉट की एक लाइट 5011 रुपए और 190 वॉट की एक लाइट में 9129 रुपए की लागत आती है। नगर परिषद के अनुसार 18 वॉट की 125, 35 वॉट की 70, 70 वॉट की 50, 110 वॉट की 30 और 190 वॉट की 25 लाइटें चोरी हुई है। इस तरह से शहर की सडक़ों से करीब 8.20 लाख की स्ट्रीट लाइट चोरी होना बताया जा रहा है। चोरी के बाद नगर परिषद ने इस मामले की शिकायत भी संबंधित थानों में दर्ज कराई है, लेकिन स्ट्रीट लाइट का काम देखने वाली कंपनी की ओर से अभी तक उक्त स्थानों पर नई लाइटें नहीं लगाई।
बिना कनेक्शन नहीं लगाते लाइट
निजी एजेंसी और नगर परिषद को स्ट्रीट लाइट चोरी करने वाली गैंग से इतना भय है कि अब नई लाइट खंभे पर लगाने से पहले बिजली का कनेक्शन लेते है। विद्युत प्रवाह शुरू होने के बाद ही उसमें लाइट फिट करते है। जिससे कि करंट के भय से बदमाश चोरी नहीं कर सके। नगर परिषद सहायक अभियंता शिखा माथुर के अनुसार कंपनी ने चोरी गई लाइट की जगह रिप्लेसमेंट नहीं किया है। उसका जुर्माना प्रतिदिन के अनुसार लगाया जा रहा है। कंपनी के अंतिम बिल में से इसकी वसूली होगी। कंपनी को इस बारे में कई बार नोटिस दिए जा चुके है। कंपनी का अंतिम बिल अगस्त 2023 में बनेगा, जिसमें से जुर्माना राशि काटकर ही भुगतान जमा किया जाएगा।
Published on:
04 Dec 2022 02:56 pm

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