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actor suman talwar ने कहा बॉलीवुड डायरेक्टर्स हॉलीवुड को कॉपी कर रहे हैं, साउथ की नई कहानियों से जनता खुद को जोड़ रही

actor suman talwar ने अजय देवगन और किच्चा सुदीप के विवाद पर कहा, अगर उत्तर भारत में एक्टर्स को फेमस होना है तो हिंदी तो सीखना ही पड़ेगी

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भोपाल। अभी लोगों के मन में एक धारणा बन गई है साउथ की फिल्में अच्छी चल रही हैं। बॉलीवुड में भी कई अच्छी फिल्में बनी हैं और बन रही हैं। वैसे मेरा मानना है कि हम सब सिनेमा के लिए काम कर रहे हैं, इसे हिंदी, तमिल, तेलगु या कन्नड़ा सिनेमा का नाम देना गलत होगा, सभी इंडियन सिनेमा का ही हिस्सा हैं। यह बात साउथ फिल्मों के स्टार सुमन तलवार नेे कही। वे एलएनसीटी विवि परिसर में कलार समाज वरिष्ठ नागरिक मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा कि साउथ की फिल्मों में कहानियों पर काफी काम हो रहा है जबकि बॉलीवुड, हॉलीवुड को कॉपी कर रहा है, इसलिए उसमें थोड़ी सी अश्लीलता भी आ गई है। साउथ में आज भी अपने ट्रेडिशनल को बरकरार रखते हुए फिल्में बनाई जाती हैं। इस कारण आम आदमी कहानी और किरदार से खुद को कनेक्ट कर पा रहा है। सिनेमा कोई भी हो, जब तक आप नए सब्जेक्ट पर काम नहीं करेंगे, तो जनता उसे नकार ही देगी।

सभी का एक दौर होता है, अभी एक्शन फिल्मों का दौर चल रहा है
सुमन ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा एक ट्रेंड चलता है, कभी ट्रेजेडी फिल्मों का ट्रेंड होता है तो कभी कॉमेडी, हॉरर और पॉलिटिकल फिल्मों का। अभी एक्शन फिल्मों का ट्रेंड चल रहा है। यदि फिल्मों में ज्यादा हिंसक सीन दिखाए जाते हैं तो इसके लिए सेंसर बोर्ड है। फिल्म प्रोड्यूसर्स तो उसी कहानी में पैसा लगाते हैं जो हिट साबित हो। केजीएफ-2, पुष्पा जैसी फिल्मों को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा मानना है फिल्मों में उतना ही वाइलेंस होना चाहिए, जो कहानी को जस्टिफाई कर सके। सेंसर बोर्ड को भी ये ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा कटेंट ना आए जिससे समाज और यूथ में गलत मैसेज जाए।

हमें हर भाषा को सीखना चाहिए
बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन और कन्नड़ा फिल्मों के एक्टर किच्चा सुदीप के बीच ट्विटर पर छिड़ी जंग को लेकर कहा कि मेरे साउथ इंडस्ट्री के जो दोस्त हैं, वे अकसर कहते हैं कि हम जब अपनी मातृभाषा में फिल्में बना सकते हैं तो हिंदी क्यों सीखें? लेकिन मैं कहता हूं अगर आपको हिंदी बेल्ट में फेमस होना है तो आपको हिंदी सीखनी ही पड़ेगी। अगर आपकी मदर टंग के अलावा हिंदी सीखना भी पड़े तो सीखना चाहिए। हमें हर भाषा का सम्मान करना चाहिए।