लोगों को दे रहीं संदेश-सेवा करने के लिए पैसे की नहीं भावनाओं की जरूरत

शहर की गृहणी अंकिता ङ्क्षसह चला रहीं आवारा श्वानों को बचाने का अभियान

पिछले पांच साल के दौरान तीन शहरों में सैंकड़ों श्वानों को बचाकर लोगों को दिया गोद


सड़कों पर आवारा घूमने वाले जानवरों की देखरेख के लिए पैसे की नहीं बल्कि भावनाओं की जरूरत है। यदि आपके भीतर जानवरों के प्रति प्रेम है तो संसाधनों की कमी आपका रास्ता नहीं रोक सकती। ये कहना है कि प्रकृति संस्था की सक्रिय सदस्य अंकिता सिंह का। अंकिता पिछले पांच साल से संस्था के साथ जुड़कर लोगों को आवारा श्वानों के प्रति जागरुक बनाने का काम कर रही हैं। गृहणी होने के नाते अंकिता ने महिलाओं का समूह बना लिया है और अब तक प्रदेश के तीन शहरों में इस तरह के अभियान शुरु कर चुकी हैं। अंकिता ने अभियान की शुरूआत भोपाल से की जिसके बाद इसे इंदौर और धार जिले तक पहुंचाया गया है।

प्रकृति संस्था ने आवारा और पालतु कुत्तों को वैज्ञानिक तरीके से जमीन में गाडऩे का काम भी शुरू कर दिया है। संस्था कुत्तों को न केवल दफनाने का काम करती है बल्कि मालिकों की भावना का सम्मान करने के लिए दफनाई हुई जगह पर 13 दिनों तक तेरहवी संस्कार भी करवाती है। संस्था के हेल्प लाइन नंबर 9993233347 पर सूचना मिलते ही वेटरनरी सहायक नसरत अहमद और चित्रांशु सेन मौके पर पहुंच जाते हैं।
कुत्तों के शव को वैज्ञानिक बरियल विधि से दफनाने के लिए संस्था ने बरखेड़ा नगर निगम कचरा खंती के पास बाकायदा कुत्तों का श्मशान तैयार किया है। यहां कुत्तों के शव को लंबाई के हिसाब से गहरा गढ्ढा खोदकर उसमें खड़ा नमक की सतह बनाकर दफनाया जाता है। वेटरनरी डॉक्टर शर्मा ने बताया कि ऐसा करने से कुत्तों के मृत शरीर से निकलने वाले जीवाणू हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं। कुत्तों को गाडऩे के बाद जमीन के ऊपर पत्थर, नुकीले कील और कांटें रख दिए जाते हैं ताकि दूसरे जानवर जमीन को खोदकर शव निकालने का प्रयास नहीं करें।

हर्ष पचौरी Reporting
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