- भेल दशहरा मैदान में जया किशोरी की संगीतमय भागवत कथा का तीसरा दिन - संगीतमय भजनों पर झूम उठे श्रोता
भोपाल. चाहे आपके पास जितना भी ज्ञान हो, लेकिन आप सरल नहीं है, तो वह ज्ञान किसी काम का नहीं है। शिक्षा वह नहीं जो आपको अहंकारी बनाए बल्कि शिक्षा वह है जो आपको सरल बनाए। आपको आपकी शिक्षा का इस्तेमाल किस तरह से करना है यह आपके विवेक के ऊपर निर्भर है।
यह बात मोटिवेशनल स्पीकर और कथावाचक जया किशोरी ने मंगलवार को भेल दशहरा मैदान पर चल रही भागवत कथा के दौरान कहीं। कथा के तीसरे दिन उन्होंने ध्रुव चरित्र सहित अन्य प्रसंगों की व्याख्या की। सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिए, जाहि विधि राखी राम भजन के साथ उन्होंने कथा की शुरुआत की। कथा के साथ-साथ संगीतमय भजनों पर मौजूद श्रोताओं ने जमकर भक्ति नृत्य किया।
लोगों से उम्मीद कम और भगवान से ज्यादा लगाओ
जया किशोरी ने कहा कि हम लोग सबसे ज्यादा उम्मीदे लोगों से लगाते हैं, जिंदगी से लगाते हैं। जबकि संत कहते हैं कि दुनिया से उम्मीदे लगाकर कोई फायदा नहीं होने वाला, क्योकि जब उम्मीदे पूरी नहीं होती तो दुख होता है। इसलिए जब हमारी उम्मीद पूरी नहीं होती तो हम दुखी हो जाते हैं। इसलिए लोगों से उम्मीद कम और भगवान से अधिक लगाओ। अपना सर्वस्त्र भगवान को अर्पित कर दो।
भगवान को धन्यवाद देना सीखिए
मोटिवेशन स्पीकर ने कहा कि हम भगवान मांगते हैं, यह अच्छी बात है। जैसे बच्चे अपने माता पिता से मांगते हैं, वैसे भगवान भी परमपिता परमात्मा है। हम मांगने के लिए तो लिस्ट लेकर बैठ जाते हैँ, लेकिन क्या कभी उसकी भी लिस्ट बनाई है, जो हमे भगवान ने दिया है। मनुष्य के पास जो होता है, उसकी उसे कद्र नहीं होती, चाहे वह लाखो की चीज हो, लेकिन उसे दो कौड़ी की ही लगेगी, लेकिन जो हमारे पास नहीं है और वह दो कौड़ी की है, तो भी वह लाखों की लगेगी। इसलिए पीछे मुड़कर देखो कि भगवान ने हमे किन कठिन परििस्थतियों से निकाला है, किस तरह मदद की है। इसलिए भगवान को धन्यवाद देना सीखिए।