गरबा में क्यों बजाते हैं 'तीन तालियां', जानिए इसकी रोचक वजह

गरबा में क्यों बजाते हैं 'तीन तालियां', जानिए इसकी रोचक वजह

By: Faiz

Published: 02 Oct 2018, 04:08 PM IST

भोपालः 10 अक्टूबर से नवरात्रि का त्यौहार शुरु होने वाले है। ऐसे में देशभर में पूरे नौ दिनो तक कई धार्मिक और सामाजिक आयोजन होते हैं। इनमें सबसे खास आयोजन है 'गरबा'। नवरात्रि के दिनों में लगभग देशभर में हर जगह गरबा की ख़ासा धूम रहती है। वैसे तो ये गुजरात का पारंपरिक नृत्य है, लेकिन इस नृत्य से मिलने वाले उत्साह और ऊर्जा के चलते यह नृत्य नवरात्रि के दिनों में सबसे प्रसिद्ध माना जाता है। हर राज्य में नवरात्रि के दौरान गरबा खेला जाता है, इसके लिए लोग दिनों पहले से नृत्य खेलने की तैयारी करने लगते हैं। इस नृत्य का इतनी जल्दी इतने फेमस होने का एक कारण यह भी है कि, गरबा के दौरान जिन स्टेप्स को फॉलो किया जाता है, वह काफी आसान होती हैं, इन्हें कोई भी व्यक्ति आसानी से सीख सकता है। इसे करने में आनंद और उत्साह बढ़ता जाता है।

अगर आप पहले गरबा खेल चुके हैं, तो आपने एक और समान स्टेप पर ध्यान दिया होगा। यह स्टेप देखने में तो इतनी सामान्य होती है कि, इसका महत्व पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता। इस स्टेप को 'तीन ताली' कहते हैं। क्या आप जानते हैं कि गरबे में एक या दो ताली का नहीं बल्कि तीन ताली को ही क्यों महत्व दिया गया है। अगर, अब तक आप इसका मुख्य कारण नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको बताएंगे इसके पीछे की मुख्य वजह।

यह है गरबा में बजाई जाने वाली तीन तालियों का महत्व

महिलाएं गरबा खेलते समय तीन तालियों का प्रयोग करती हैं। इसके पीछे भी एक बड़ी वजह है। दरअसल, पूरा ब्रह्मांड ब्रह, विष्णु, महेश के इर्द-गिर्द ही घूमता है। इन तीन देवों की कलाओं को एकत्रित कर शक्ति का आहवान किया जाता है। इसमें हर ताली का अपना एक महत्व होता है। तो आइये जानते हर ताली का क्या महत्व होता है।

-पहली ताली का महत्व

गरबा में पहली ताली ब्रह यानि इच्छा से संबंधित है। ब्रह्मा की इच्छा तरंगों को ब्रहमांड के अंतर्गत जागृत किया जाता है। यह मनुष्य की भावनाओं और इच्छाओं का समर्थन करती है।

-दूसरी ताली का महत्व

दूसरी ताली का संबंध विष्णु भगवान से होता है। विष्णु रूपी तरंगे मनुष्य के भीतर शक्ति प्रदान करती है।

-तीसरी ताली का महत्व

तीसरी ताली का संबंध शिव भगवान से है। शिव रूपी ज्ञान तरंगें मनुष्य की इच्छा पूरी कर उसे फल प्रदान करती हैं। ताली की आवाज से तेज निर्मित होता है और इस तेज की मदद से शक्ति स्वरूप मां अंबा जागृत होती है। ताली बजाकर इसी तेज रूपी मां अंबा की अराधना की जाती है।

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