scriptOfficials got many NGT orders entangled in paperwork | अ​धिकारियों ने कागजी कार्रवाई में उलझाए एनजीटी के कई आदेश | Patrika News

अ​धिकारियों ने कागजी कार्रवाई में उलझाए एनजीटी के कई आदेश

locationभोपालPublished: Dec 09, 2023 08:02:03 pm

एनजीटी कई बार कर चुका तीखी टिप्पणियां, मुख्य सचिव को भी लगाई थी फटकार लेकिन सब बेअसर, पर्यावरण संरक्षण अफसरों की प्राथमिकता में नहीं, केवल पत्राचार और कागजी प्लान पेश कर बढ़वाते रहते हैं तारीख

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एनजीटी के आदेश के बावजूद अधूरा पड़ा स्लॉटर हाउस
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने शहर के पर्यावरण हित में कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। इन आदेशों को लोगों की वाहवाही भले मिली हो लेकिन नागरिकों को इनका कोई लाभ नहीं मिल पाया है। क्योंकि जिम्मेदार अधिकारियों ने सालों से इन आदेशों के अमल को सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझा रखा है। हाल ही में एनजीटी ने बड़ा तालाब रामसर साइट के वेटलैंड से कब्जे नहीं हटने को लेकर प्रशासन और अधिकारियों पर तीखी टिप्पणियां की हैं। इकसे पहले मुख्य सचिव को भी फटकार लगाई थी। लेकिन कई बार टिप्पणियां होने के बावजूद अभी भी कई आदेशों पर आधा-अधूरा अमल ही हो पाया है। अभी तक न तो डेयरियों की शिफि्टंग हो पाई और न ही स्लॉटर हाउस आधुनिक हो पाया। सीवेज फार्मिंग भी पहले की तरह हो रही है। केरवा-कलियासोत के कब्जे भी चिन्हित हो गए हैं लेकिन कार्रवाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
राजधानी में इन आदेशों पर नहीं हो पाया अमल

एफटीएल के कब्जे बरकरार

एनजीटी ने 8 साल पहले बड़े तालाब के एफटीएल के 50 मीटर दायरे में आने वाले अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। इसके लिए एफटीएल का दायरा तय किया गया। लेकिन कुछ रसूखदारों ने इसके लिए लगाई गई मुनारें तक उखाड़ डाली। लेकिन 50 मीटर दायरा तो दूर वेटलैंड तक के अतिक्रमण नहीं हटाए जा सके। नवाब सिद्दीक हसन खां तालाब के भी कब्जे चिन्हित कर उन्हें हटाने के आदेश नगर निगम को दिए गए थे लेकिन कब्जे जस के तस हैं।
स्लॉटर हाउस की न शिफ्टिंग हुई और न अपडेशन

एनजीटी ने शहर के बीच में जिंसी में संचालित स्लॉटर हाउस को 10 साल पहले शहर से बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया था। शिफ्टिंग के लिए एनजीटी ने 31 मार्च 2018 की डैडलाइन भी तय की थी। इस समय सीमा में भी नगर निगम और शासन स्लॉटर हाउस शिफ्ट नहीं कर पाया तो 10 हजार रूपए प्रतिदिन जुर्माना लगाया गया। इसके साथ जिंसी पर संचालित स्लॉटर हाउस को भी ट्रिब्यूनल ने बंद करा दिया था। लेकिन नगर निगम पहले जमीन खोजने की बात करता रहा। इसके बाद ग्रामीणों के विरोध की बात कही। बाद में यह तय हुआ कि वहीं पर जीरो डिस्चार्ज वाला अत्याधुनिक स्लॉटर हाउस बनाया जाएगा लेकिन वह भी अब तक नहीं बना।
डेयरियों की शहर से बाहर शिफ्टिंग

एनजीटी ने शहर के अंदर संचालित करीब 765 डेयरियों को शहर के बाहर शिफ्ट करने का आदेश सात साल पहले जारी किया था। इसके साथ डेयरियों के लिए पॉलिसी बनाने और एसटीपी आदि बनाने के संबंध में भी आदेश दिया गया है। नगर निगम ने 7 स्थान परवलिया, अरवलिया, कालापानी, ग्राम दीपड़ी, तूमड़ा, मुगालिया कोट और फतेहपुर डोबरा शिफ्टिंग के लिए चयनित किए थे। यहां पर शासन ने 7-7 एकड़ जमीन भी आवंटित कर दी है। 15 जून 2018 तक शिफ्टिंग का काम पूरा करने का आदेश दिया गया था। लेकिन इसके बाद एनजीटी में सुनवाई अनियमित हो जाने के चलते नगर निगम ने अभी तक शिफ्टिंग पूरी नहीं की है। जबकि शहर की अंदर डेयरियों से जहां गंदगी फैलती है वहीं मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं भी बढ़ती हैं।
कलियासोत नदी के 33 मीटर दायरे के अतिक्रमण हटाना

एनजीटी ने करीब दस साल पहले कलियासोत नदी किनारे के दोनों ओर 33 मीटर क्षेत्र में ग्रीन बैल्ट की जमीन से अतिक्रमण हटाकर सघन पौधरोपण करने का आदेश पारित किया था। लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। इसके बाद दोबारा लगाई गई केरवा-कलियासोत संबधी याचिका में इसी साल सितंबर माह में मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद समिति ने 129 अतिक्रमण चिन्हित कर लिए जबकि इसके पहले समिति को एक भी अतिक्रमण नहीं मिला था। इसके साथ कॉलोनियों का सीवेज सीधे गिरने से रोकने के लिए एसटीपी लगाने का भी आदेश दिया। इसका भी कागजी प्लान बनाकर अधिकारियों ने पेश कर दिया है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई है।
आदेश के बावजूद खुले में बह रहा सीवेज

एनजीटी ने तीन साल पहले सीवेज खुले में बहाने पर रोक लगाने के आदेश नगर निगम को दिए थे। दो बिल्डरों पर करोड़ों रूपए का पर्यावरण क्षति हर्जाना भी लगाया था। लेकिन हालत यह है कि अयोध्या नगर, करोंद आदि क्षेत्रों की कई कॉलोनियों में सीवेज खुले में बहाया जा रहा है। इस पर प्रभावी रोक अभी तक नहीं लग पाई है। केवल अमृत-2 के तहत बिछाए जाने वाले सीवेज नेटवर्क का कागजी प्लान दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जुर्माना लगाने के लिए कहा था लेकिन किसी पर बड़ा जुर्माना भी नहीं लगाया गया।
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नहीं रुकी सीवेज फार्मिंग

एनजीटी ने करीब 12 साल पहले सीवेज फार्मिंग पर प्रतिबंध लगाने के साथ इससे केवल फूल उगाने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों ने दिखावे के लिए शाहपुरा में केवल कुछेक खेतों पर जेसीबी चलवाकर फसल नष्ट कराई थी। लेकिन अभी हालत यह है कि राजधानी में पातरा नाले के आसपास खूब सीवेज फार्मिंग हो रही है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

सरकारी विभाग, अधिकारी और एजेंसियां पर्यावरण संंबंधी मामलों को प्राथमिकता नहीं देते हैं। एनजीटी एक्ट की धारा 25, 26 और 27 में नॉन कंप्लाएंस की स्थिति में कार्रवाई के प्रावधान हैं। इसमें आदेश का पालन नहीं करने पर पेनाल्टी लगाने सहित अन्य तरह से ट्रिब्यूनल कार्रवाई करता है। लेकिन इसके लिए अलग से पिटीशन लगाना पड़ती है। यह पिटीशन लगाकर अमल कराया जा सकता है।
- ओमशंकर श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता एनजीटी

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