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पीएचसी में जनरेटर नहीं, मोमबत्ती का सहारा

डेहरी आमढाना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को दीए या मोमबत्ती की रोशनी में रात काटनी पड़ती है। सबसे ज्यादा पेरशानी प्रसूति के लिए आने वाली महिलाओं को उठानी पड़ती है। 

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Pali City

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Sanket Shrivastava

Nov 03, 2015

चोपना-
डेहरी आमढाना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को दीए या मोमबत्ती की रोशनी में रात काटनी पड़ती है। सबसे ज्यादा पेरशानी प्रसूति के लिए आने वाली महिलाओं को उठानी पड़ती है। कई बार तो बिजली गुल होने की स्थिति में प्रसूताओं के साथ आने वाले परिजनों को दीए की रोशनी से अस्पताल का अंधेरा दूर कर रतजगा तक करना पड़ता है। कई बार ग्राम के लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने की मांग को लेकर जिले के अधिकारियों से मांग की पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका है।ग्रामीणों का कहना है कि पीएचसी में संसाधनों की कमी से भी मरीजों की फजीहत होती है।

मरीज के परिजनों ने बताई समस्या

ग्राम पंचायत आमढाना निवासी राजदान नर्रे ने बताया कि एक नवंबर को सुबह उनकी पत्नी दुर्गा नर्रे को प्रसव पीड़ा के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था दोपहर में प्रसव होने के बाद उन लोगों को अस्पताल में रूकना पड़ा। उन्होंने बताया कि बिजली गुल होने से पूरी रात उन लोगों को दीए की रोशनी में रहना पड़ा।

नर्स के भरोसे चल रहा अस्पताल

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से नर्स और एक वार्डबाय के भरोसे संचालित हो रहा है जबकि स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत ३२ गांव आते हैं। अस्पताल में संसाधनों की कमी भी बनी है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में स्थाई डाक्टरों और स्टाफ की मांग कई बार कर चुके हैं। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका है।