अघोषित बिजली कटौती पर मुआवजा दिलाने दिल्ली सरकार ने बनाई पावर कट पॉलिसी... मप्र में पहले से तय है!

अघोषित कटौती पर उपभोक्ता शिकायत करें तो... कंपनी को भोपाल में ही देना पड़े एक माह में दस लाख का मुआवजा

By: दीपेश तिवारी

Published: 25 Apr 2018, 06:20 PM IST

भोपाल। बिजली अघोषित कटौती पर दिल्ली सरकार उपभोक्ताओं को जो मुआवजा दिलाने की तैयारी कर रही है, मप्र में इसका प्रावधान पहले से ही है। इस मुआवजे को लेने के लिए उपभोक्ता कमर कस लें तो भोपाल में ही कंपनी को एक माह में 10 लाख देना पड़े। कटौती का मुआवजा लेने ग्रामीण, शहर के अंचल के उपभोक्ता सामने आ जाएं तो आंकड़ा करोड़ों में होगा।

मप्र इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में स्पष्ट प्रावधान है कि बिना पूर्व सूचना चार घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रही तो उपभोक्ताओं को प्रतिघंटा 25 रुपए की दर से मुआवजा मिलेगा। बीते एक माह का ही आंकड़ा लें तो शहर के 10 क्षेत्रों में बिना पूर्व सूचना पांच घंटे तक कटौती हुई। एक क्षेत्र में बिजली गुल होने से एक फीडर प्रभावित होता है। इसमें 1000 उपभोक्ता होते हैं। सभी मुआवजा लें तो एक बार में प्रति उपभोक्ता 100 रुपए के हिसाब से ही एक लाख बनता है। दस बार में ये दस लाख रुपए बनेंगे।

दिल्ली सरकार की पावर कट पॉलिसी

दिल्ली की सरकार अघोषित कटौती पर मुआवजा देने का नियम बना रही है। प्रावधान किया जा रहा है कि एक घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी उपभोक्ताओं को इसका भुगतान करेगी। इसे न्यू पावर कट पॉलिसी करार दिया जा रहा है। पहले दो घंटों के लिए 50 रुपए, इसके बाद प्रति दो घंटा 100 रुपए भुगतान करना होगा। इसमें ये भी प्रावधान किया कि ये यदि डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी मुआवजा सीधे भुगतान नहीं करेगी तो उपभोक्ता रेग्लुटरी कमिशन में अपील कर सकेगा, जहां कम से कम 5000 रुपए या इसका पांच गुना मुआवजा दिलाया जाएगा।

इन क्षेत्रों में परेशानी

कोलार, करोंद, भदभदा, जहांगीराबाद, मंगलवारा, अशोका गार्डन, चांदबड़, मिसरोद, छोला, आरिफ नगर, गेहूंखेड़ा, आईबीडी हॉलमार्क, नीलबड़, रातीबड़, इंद्रपुरी समेत 82 क्षेत्र हैं, जहां अघोषित कटौती होती रहती है।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

डीआईजी बंगला क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद फराज क्षेत्र में चार घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल होने पर पांच बार बिजली कंपनी मुख्यालय समेत नियामक आयोग में आवेदन दिया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह बाग मुगालिया एक्सटेंशन के उमाशंकर तिवारी करीब एक दर्जन रहवासियों के साथ नियामक आयोग में आवेदन दे चुके हैं, लेकिन आवेदन लेने के बाद मुआवजा देने पर गंभीरता नहीं दिखाई गई।

मप्र विद्युत नियामक आयोग में सामूहिक शिकायत में मामला दिखाते हैं। इन आवेदनों को भी दिखवा लेंगे। जो नियमानुसार होगा, उसे आगे बढ़ाएंगे।

-शैलेंद्र सक्सेना, सचिव, मप्र विद्युत नियामक आयोग

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