फिर चर्चा में आया देश को दहला देने वाला शहला मसूद हत्याकांड, गर्माई मध्य प्रदेश की राजनीति

फिर चर्चा में आया देश को दहला देने वाला शहला मसूद हत्याकांड, गर्माई मध्य प्रदेश की राजनीति

Faiz Mubarak

September, 1303:16 PM

Bhopal, Madhya Pradesh, India

भोपालः मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साल 2011 में हुए आरटीआई एक्टिविस्ट शहला मसूद के बाहुचर्चित हत्याकांड ने देश-प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया था। यह मामला एक बार सुर्खियों में आ गया है। इस बार इस मामले के चर्चा में आने का कारण है हत्या में शामिल आरोपी शाकिब डेंजर। आपको बता दें कि, तमाम कोशिशे करने के बाद हाईकोर्ट ने शाकिब 20 दिन की ज़मानत दे दी है। बता दें कि, इस बाहुचर्चित हत्याकांड में मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार के पूर्व राज्यपाल गोविंद नारायण सिंह के बेटे ध्रुवनारायण सिंह का नाम आने से मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया था। इस मामले में नाम आने के कारण ही मीडिया और विपक्ष के दबाव में आकर विधायक ध्रुवनारायण सिंह को अपना पद छोड़ना पड़ा था।

इसलिए शुरु हुई राजनीतिक सुगबुगाहट

शाकिब डेंजर को कोर्ट से जमानत मिलने के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट शुरु हो गई है। क्योंकि, मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बार फिर कयास लगाए जा रहे हैं। कि, ध्रुवनारायण सिंह मध्य प्रदेश के किसी विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी कर सकते हैं। जानकारों का मानना है कि, भले ही थोड़े दिन के लिए सही, लेकिन शाकिब के जेल से बाहर आने का राजनीतिक लाभ विपक्ष उठा सकता है। वैसे भी कांग्रेस इस बार हर तरह से प्रदेश की बीजेपी सरकार को घेरने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। ऐसे में शाकिब का जेल से बाहर आना राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकता है। हालांकि, शहला मसूद हत्याकांड में सीबीआई की ओर से ध्रुवनारायण सिंह को क्लीन चिट मिल चुकी है। लेकिन यह राजनीति है, इसमें कब, किसे और किस बहाने से घेर लिया जाए कोई भरोसा नहीं किया जा सकता।

यह था बाहुचर्चित शहला मसूद हत्याकांड मामला

बता दें कि, 16 अगस्त 2011 को राजधानी भोपाल की बड़ी आरटीआई एक्टिविस्ट 38 वर्षीया शहला मसूद की उसके घर के बाहर कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मामले को लेकर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी इस केस की कड़ियां उलझने लगीं इस बीच मीडिया के दबाव में आकर प्रदेश सरकार ने 19 अगस्त 2011 को यह जांच सीबीआई को सौंप दी।

जैसे जैसे सीबीआई की जांच आगे बढ़ी इसमें कई सनसनीखेज़ खुलासे हुए एक अप्रत्याशित प्रेम त्रिकोण भी सामने आया, जिसने जांच की दिशा ही बदलकर रख दी। इस प्रेम त्रिकोण में शामिल पात्र थेः प्रेम दीवानी जाहिदा परवेज, जिसकी शादी भोपाल के सबसे रईस बोहरा खानदानों में से एक में हुई थी। आशिक मिजाज ध्रुव नारायण सिंह और तेजतर्रार शहला मसूद, जो इवेंट मैनेजमेंट प्रोफेशनल होने के साथ आरटीआइ एक्टिविस्ट भी थीं।

जाहिदा की डायरी ने किया खुलासा

सीबीआई के शक के दायरे में आने के बाद 29 फरवरी 2012 को गठित टीम ने जाहिदा परवेज के आफिस पर दबिश दी, जिसमें इस दबिश में टीम को केस से जुड़ी एक ऐसी अहम चीज मिली जिसने उलझी हुई सभी कड़ियां खोल दीं। इससे कई सनसनीखेज खुलासे हुए। इसके बाद सीबीआई की टीम ने इस पूरे हत्याकांड को रचने वाली आरोपी जाहिदा परवेज़ को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में ज़ाहिदा ने कई सनसनी खेज खुलासे किए इसमें यह भी जिक्र था कि, हत्या में शाकिब डेंजर का क्या रोल था। हालांकि, अदालत ने साल 2017 में जाहिदा परवेज को जमानत पर छोड़ दिया।

हत्या में शाकिब की भूमिका

सीबीआई के वकील सोहन लाल नागर ने तर्क दिए कि मुख्य आरोपी जाहिदा परवेज के कहने पर शाकिब ने ही शूटर इरफान और ताबिश को कानपुर से बुलाया और अपने घर रखा था। इन्होंने तीन दिन तक शेहला के घर की रैकी की। उसके बाद रिवाल्वर व तीन कारतूस भी दिए। इरफान व ताबिश ने शाकिब के कहने पर शेहला की हत्या की। शाकिब भी घटनास्थल के पास मौजूद था। वकील ने अदालत से कहा- वारदात के बाद तीनों एक जगह इकट्ठा हुए, जहां जाहिदा कार में आई। उसने इरफान को तीन लाख रुपए दिए और सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि, जाहिदा ने शाकिब को पांच लाख रुपए की सुपारी दी थी।

शाकिब को ज़मानत मिलने की वजह

शहला मसूद की हत्या के आरोप में शाकिब डेंजर को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा का ऐलान किया था। शाकिब के वकील एडवोकेट राजेन्द्र पंडित ने पत्रिका को बताया कि, उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। इसपर हाईकोर्ट ने पांच लाख रुपए की जमानत लेकर शाकिब को 20 दिनों के लिए अपनी बेटी की शादी कार्यक्रम में शामिल होने की इजाज़त दी है। बता दें कि, 15 सितंबर को शाकिब की बेटी भोपाल में शादी होनी है।

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