
भोपाल. देशभर की तरह मध्यप्रदेश में भी कोरोना का कहर बरकरार है. नए मरीज लगातार बढ़ रहे हैं. इस बीच यह बात भी सामने आई है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज टीबी का शिकार हो रहे हैं. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने तीसरी लहर और पहले के मरीजों में आ रही टीबी के संक्रमण की जानकारी के बाद केंद्र सरकार को मरीजों के इलाज के लिए संशोधित गाइडलाइन दी है.
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च आइसीएमआर का कहना है कि कोरोना से फैफड़े कमजोर हो जाते हैं जिससे इसके मरीजों पर टीबी के संक्रमण की खतरा सबसे ज्यादा होता है. कोरोना संक्रमित मरीजों में टीबी के संक्रमण के केसेस भी बहुत मिल रहे हैं. इस बात की जानकारी मिलने के बाद आ रही आइसीएमआर ने केंद्र सरकार को मरीजों के इलाज के लिए संशोधित गाइडलाइन दे दी है.
इस संबंध में रीजनल रेस्पेरेटरी इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पराग शर्मा बताते हैं कि कोरोना के बाद फैफड़े कमजोर होते हैं. ऐसे में तीनों लहर के बाद किसी मरीज को दो से तीन सप्ताह तक खांसी हो तो टीबी का संक्रमण हो सकता है.
आइसीएमआर ने केंद्र को दी सलाह, कोरोना के बाद दो-तीन सप्ताह तक खांसी हो तो कराएं टीबी की जांच— आइसीएमआर के अनुसार कोरोना के मरीजों को जरा सी भी दिक्कत महसूस होने पर टीबी की जांच करानी चाहिए. ऐसे संक्रमित जिन्हें कोरोना के हल्के लक्षण हैं इसके बावजूद उन्हें दो से तीन सप्ताह तक लगातार खांसी बनी हुई है, बुखार भी है तो ऐसे संक्रमितों की टीबी की जांच जरूर कराना चाहिए. इससे हकीकत का पता चल सकेगा.
ये जरूर कराएं टीबी की जांच:
— बुजुर्ग मरीज
— मधुमेह, दिल की बीमारी, हार्ट में ब्लाकेज के मरीज
— टीबी, एचआइवी, फेफड़े, लिवर, किडनी व मोटापा से पीडि़त मरीज
— हल्के संक्रमण से जूझ रहे ऐसे मरीज, जिन्हें 5 दिन से ज्यादा समय तक सांस लेने में दिक्कत हो।
Updated on:
22 Jan 2022 08:41 am
Published on:
22 Jan 2022 08:41 am
