म.प्र. व्यापक श्रम सुधार करने वाला प्रथम राज्य, मंत्रियों ने देखे प्रजेंटेशन

मंत्री जिलों के नागरिकों और विभिन्न वर्गों से संवाद कर सुझाव प्राप्त करेंगे
मुख्यमंत्री चौहान ने की मंत्रियों से चर्चा

By: Ashok gautam

Published: 12 May 2020, 10:36 PM IST

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में संपन्न बैठक में तीन प्रेजेंटेशन हुए। मध्यप्रदेश में श्रम सुधार, मंडी अधिनियम और नियमों में बदलाव और निवेश प्रोत्साहन के प्रयासों पर मुख्यमंत्री चौहान एवं मंत्रियो ने प्रेजेंटेशन देखे।

मुख्यमंत्री चौहान ने इस अवसर पर बताया कि कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मध्यप्रदेश में किए गए श्रम सुधारों की जानकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान दी गई। मध्यप्रदेश पहला राज्य है जिसने कोरोना संकट के संदर्भ में निवेश एवं रोजगार वृद्धि के लिए व्यापक श्रम सुधार किए हैं।

मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी से कल हुई चर्चा के बाद राज्यों की लॉकडाउन की स्थितियों पर आवश्यक व्यवस्थाएँ करने के संबंध में राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों अनुसार आवश्यक निर्णय लेने के लिए कहा गया है। प्रमुख रूप से कंटेनमेंट क्षेत्र में गतिविधियों को सीमित रखते हुए ऑरेंज और ग्रीन क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों का समय निर्धारित किया जाएगा। यह निर्णय लिया गया है कि इस अवधि में धार्मिक और सामाजिक सेवाएँ उत्सव आदि नहीं होंगे।

सुझाव प्राप्त करने के लिये मंत्रियों को दायित्व
बैठक में निर्णय लिया गया कि मंत्री 13 मई तक जिलों के क्राइसिस मेनेजमेंट ग्रुप से लॉकडाउन-4 के संबंध में आवश्यक व्यवस्थाओं और आर्थिक गतिविधियों के संचालन के संबंध में सुझाव प्राप्त करेंगे। इसके पश्चात राज्य स्तर से सुझाव एकीकृत कर भारत सरकार को प्रेषित किये जायेगें। मंत्रि गण अपने प्रभार के संभागों के कुछ जिलों के समूह बनाकर चर्चा करेंगे। यह चर्चा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा होगी।

श्रम सुधार

मध्यप्रदेश में महत्तवपूर्ण श्रम सुधार किये गये हैं। पूर्व में 13 केन्द्रीय एवं 4 मध्यप्रदेश के कानूनों में आवश्यक 32 श्रम संशोधन किये जा चुके हैं । इनकी अधिसूचना 27 नवम्बर 2015 को जारी हुई थी। इज ऑफ-डूईंग बिजनेस के लिये 32 प्रक्रियात्मक सुधार कर 30 जरूरी सेवाओं को मध्यप्रदेश लोकसेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम में शामिल किया गया। हाल ही में कारखाना अधिनियम में 2 महत्तवपूर्ण सुधारों के लिये भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। पूर्व में 13 रिटर्न भरने होते थे जिसे घटाकर 2 किया गया था। अब सिर्फ एक रिटर्न ही भरना होगा। एक महत्तवपूर्ण संशोधन कारखानों में कार्य की अवधि को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटा किया जाना है।

मंडी अधिनियम एवं नियमों में बदलाव

बैठक में बताया गया कि राज्य में किसानों को फसल बेचने के तीन विकल्प उपलब्ध हैं। मंडी में विक्रय की सुविधा, सौदा पत्रक के माध्यम से किसान के घर अथवा खेत से फसल लेने की व्यवस्था और प्रायवेट मंडी से फसल बेचने की सुविधा से उपार्जन कार्य को गति मिली है। ऐसा प्रावधान करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। प्रदेश में 940 नये क्रय केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं।

निवेश प्रोत्साहन

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रेजंटेशन में बताया गया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री चौहान से उद्योगपतियों की चर्चा के पश्चात विश्वास का वातावरण बना है। कोरोना संकट के बाद लॉकडाउन की स्थिति में 5200 कारखानों को प्रारंभ कर श्रमिक आवागमन की मंजूरियाँ दी गईं। इसके फलस्वरूप 10 अप्रेल को जिस 25 प्रतिशत क्षमता से ईकाइयां कार्य कर रहीं थीं वो 10 मई को 68 प्रतिशत क्षमता के साथ कार्य कर रहीं हैं। आकर्षक गारमेंट नीति में 200 प्रतिशत तक वापसी,

सुझाव प्राप्त करने के लिये मंत्रियों को दायित्व
बैठक में निर्णय लिया गया कि मंत्री 13 मई तक जिलों के क्राइसिस मेनेजमेंट ग्रुप से लॉकडाउन-4 के संबंध में आवश्यक व्यवस्थाओं और आर्थिक गतिविधियों के संचालन के संबंध में सुझाव प्राप्त करेंगे। इसके पश्चात राज्य स्तर से सुझाव एकीकृत कर भारत सरकार को प्रेषित किये जायेगें। मंत्रि गण अपने प्रभार के संभागों के कुछ जिलों के समूह बनाकर चर्चा करेंगे। यह चर्चा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा होगी।

श्रम सुधार

मध्यप्रदेश में महत्तवपूर्ण श्रम सुधार किये गये हैं। पूर्व में 13 केन्द्रीय एवं 4 मध्यप्रदेश के कानूनों में आवश्यक 32 श्रम संशोधन किये जा चुके हैं । इनकी अधिसूचना 27 नवम्बर 2015 को जारी हुई थी। इज ऑफ-डूईंग बिजनेस के लिये 32 प्रक्रियात्मक सुधार कर 30 जरूरी सेवाओं को मध्यप्रदेश लोकसेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम में शामिल किया गया। हाल ही में कारखाना अधिनियम में 2 महत्तवपूर्ण सुधारों के लिये भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। पूर्व में 13 रिटर्न भरने होते थे जिसे घटाकर 2 किया गया था। अब सिर्फ एक रिटर्न ही भरना होगा। एक महत्तवपूर्ण संशोधन कारखानों में कार्य की अवधि को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटा किया जाना है।

मंडी अधिनियम एवं नियमों में बदलाव

बैठक में बताया गया कि राज्य में किसानों को फसल बेचने के तीन विकल्प उपलब्ध हैं। मंडी में विक्रय की सुविधा, सौदा पत्रक के माध्यम से किसान के घर अथवा खेत से फसल लेने की व्यवस्था और प्रायवेट मंडी से फसल बेचने की सुविधा से उपार्जन कार्य को गति मिली है। ऐसा प्रावधान करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। प्रदेश में 940 नये क्रय केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं।

निवेश प्रोत्साहन

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रेजंटेशन में बताया गया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री चौहान से उद्योगपतियों की चर्चा के पश्चात विश्वास का वातावरण बना है। कोरोना संकट के बाद लॉकडाउन की स्थिति में 5200 कारखानों को प्रारंभ कर श्रमिक आवागमन की मंजूरियाँ दी गईं। इसके फलस्वरूप 10 अप्रेल को जिस 25 प्रतिशत क्षमता से ईकाइयां कार्य कर रहीं थीं वो 10 मई को 68 प्रतिशत क्षमता के साथ कार्य कर रहीं हैं। आकर्षक गारमेंट नीति में 200 प्रतिशत तक वापसी,

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