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लाड़ली बहना योजना में लाखों की छंटनी, जानिए किन महिलाओं के कट रहे नाम

locationभोपालPublished: Jan 15, 2024 09:31:20 pm

Submitted by:

deepak deewan

एमपी की लाड़ली बहना योजना को गेम चेंजर कहा गया है। प्रदेश में विधानसभा चुनावों में बीजेपी की बंपर जीत की वजह भी इसी योजना को बताया जाता रहा है हालांकि योजना पर अब कई सवाल उठने लगे हैं। 10 जनवरी को जहां मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं के खातों में ₹1576 करोड़ की धनराशि भेजी वहीं ये बात भी सामने आई कि कई महिलाओं के खाते ही बंद कर दिए गए हैं।

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कई महिलाओं के खाते ही बंद कर दिए गए हैं।

एमपी की लाड़ली बहना योजना को गेम चेंजर कहा गया है। प्रदेश में विधानसभा चुनावों में बीजेपी की बंपर जीत की वजह भी इसी योजना को बताया जाता रहा है हालांकि योजना पर अब कई सवाल उठने लगे हैं। 10 जनवरी को जहां मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं के खातों में ₹1576 करोड़ की धनराशि भेजी वहीं ये बात भी सामने आई कि कई महिलाओं के खाते ही बंद कर दिए गए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने बाकायदा सोशल मीडिया पर पोस्ट कर यह बात बताई। योजना में महिलाओं के खाते क्यों बंद हो रहे हैं, अब इसकी वजह भी सामने आई है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर ट्विटर पर सवाल उठाया था। उन्होंने लिखा कि एमपी सरकार ने 2 लाख बहनों की छंटनी कर दी। सितंबर 2023 में जहां योजना के अंतर्गत लाभ पानेवाली बहनों की संख्या 1.31 करोड़ थी, वहीं अब यह 1.29 करोड़ रह गई है।

लाड़ली बहना योजना में लाखों महिलाओं की छंटनी क्यों हो गई, इसकी वजह छिंदवाड़ा में सामने आई। यहां पिछले माह 4 लाख 7 हजार महिलाओं को योजना का लाभ मिला था जबकि इस माह यानि जनवरी में केवल 4 लाख महिलाओं के खातों में राशि आई। इस प्रकार 7 हजार महिलाएं योजना से वंचित रह गई।

लाड़ली बहना योजना से 7 हजार नाम हट जाने की निम्न वजहें सामने आईं
— ऐसी महिलाएं जो एक से अधिक योजनाओं का लाभ ले रही हैं, उन्हें इस योजना से हटा दिया गया है।
— डीबीटी की गड़बड़ी के कारण महिलाएं लाभ से वंचित हो रहीं हैं।
— योजना का लाभ अधिकतम 60 साल की उम्र की महिलाओं को ही दिया जा रहा है।
— कई महिलाओं ने खुद ही इसका लाभ लेना छोड़ दिया है।

छिंदवाड़ा के महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार दिसंबर में 5 हजार 660 महिलाएं अधिकतम आयुसीमा को पार कर गईं। डीबीटी में गड़बड़ी के कारण 1 हजार महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिल सका। 369 महिलाओं ने लाभ छोड़ने वाला विकल्प चुना।

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