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अधिकारियों की खुली नींद, हालात जानने पहुंचे एसटीपी

बल्लभ गार्डन व सुजानदेसर एसटीपी का किया निरीक्षण बल्ल्भ गार्डन एसटीपी का जुड़ेगा विद्युत कनेक्शन  

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अधिकारियों की खुली नींद, हालात जानने पहुंचे एसटीपी

अधिकारियों की खुली नींद, हालात जानने पहुंचे एसटीपी

बल्लभ गार्डन में स्थापित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अब जल्द विद्युत से संचालित होगा। पिछले कई महीनों से यह एसटीपी जनरेटर से संचालित हो रहा है। करीब ढाई करोड रुपए की राशि बकाया होने के कारण इस एसटीपी का विद्युत कनेक्शन विच्छेद हो रखा है। संबंधित फर्म इस एसटीपी को जनरेटर से चला रही है। शनिवार को नगर निगम, नगर विकास न्यास और आरयूआईडीपी के अधिकारियों के साथ निरीक्षण करने पहुंचे संभागीय आयुक्त डॉ. नीरज के पवन ने निगम आयुक्त सहित कंपनी के प्रतिनिधि को बकाया बिल की राशि भरकर विद्युत कनेक्शन जुड़वाने और विद्युत से एसटीपी संचालित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एसटीपी जनरेटर से चल रहा था। संभागीय आयुक्त इस एसटीपी के विभिन्न यूनिट में पहुंचे और एसटीपी संचालन की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान न्यास सचिव यशपाल आहूजा, निगम आयुक्त गोपालराम बिरदा, निगम संभागीय अधीक्षण अभियंता ललित ओझा, न्यास, निगम और आरयूआईडीपी के अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता साथ रहे।

यहां भी किया निरीक्षण

संभागीय आयुक्त ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ नगर निगम के डंपिंग यार्ड व कचरा पृथक्करण इमारत का भी निरीक्षण किया। घर-घर कचरा संग्रहित कर यहां पहुंच रहे वाहनों के कचरे को तौलने की जानकारी भी ली। इसके बाद संभागीय आयुक्त आरयूआईडीपी के सुजानदेसर कालीमाता मंदिर के पास िस्थत एसटीपी पहुंचे व एसटीपी का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

पत्रिका ने उठाया मुद्दा

राजस्थान पत्रिका ने शहर में तीन स्थानों पर संचालित हो रहे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की अनदेखी और बदतर हालात को लेकर जिम्मेदारों की अनदेखी अभियान के माध्यम से समाचारों का प्रकाशन किया। समाचारों के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कर बताया कि एसटीपी के संचालन में किस प्रकार की कोताही बरती जा रही है व कमजोर मॉनिटरिंग हो रही है। बल्लभ गार्डन, सुजानदेसर और सरह नथानिया क्षेत्र में करोड़ो की लागत से तैयार हुए एसटीपी में बिजली का कनेक्शन नहीं होने, मशीनों के बंद होने, पक्षियों की ओर से मशीनों पर घोंसले बनाने, शोधित पानी का उपयोग नहीं होने आदि कमियों को उजागर किया था।