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दाल-बाटी के शौकीन थे कल्याण सिंह, चार दिन तक खाए बीकानेरी भुजिया

bikaner news - Kalyan Singh was fond of lentils, ate Bikaneri Bhujia for four days

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दाल-बाटी के शौकीन थे कल्याण सिंह, चार दिन तक खाए बीकानेरी भुजिया

दाल-बाटी के शौकीन थे कल्याण सिंह, चार दिन तक खाए बीकानेरी भुजिया

स्मृति शेष: पूर्व राज्यपाल सिंह का बीकानेर से रहा था खास लगाव
बीकानेर.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं राजस्थान के राज्यपाल पद पर रहे कल्याण सिंह का बीकानेर से अच्छा-खासा लगाव रहा है। वे बीकानेरी भुजिया और दाल-बाटी चूरमे के खास शौकीन थे।

राज्यपाल रहते हुए जब भी वे बीकानेर आए भुजिया और दाल-बाटी का स्वाद लिए बिना वे नहीं रहे। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के दिसम्बर २०१५ में हुए द्वितीय दीक्षांत समारोह में वे चार दिन तक बीकानेर रहे थे। इस बीच उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वे बीकानेर के लोगों की बोली, उनका रहन-सहन और यहां के विशिष्ट खाद्य पदार्थों के खासे प्रभावित हुए। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव डॉ. बिठ्ठल बिस्सा ने बताया कि अपने चार दिवसीय दौरे के बाद जब वे बीकानेर से जयपुर लौटे तो काफी प्रसन्न थे।

बिस्सा ने बताया कि पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह की फरमाइश पर ही विशेष तौर पर दाल-बाटी चूरमा तैयार करवाया गया था। उन्होंने बताया कि जब तक वे बीकानेर रहे, उनकी थाली और नाश्ते की प्लेट में बीकानेरी भुजिया जरूर होता था। पूर्व राज्यपाल सिंह पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में भी बीकानेर आए थे।

20 मिनट का कार्यक्रम दो घंटे चला
पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह के बीकानेर प्रवास के दौरान तत्कालीन प्रोटोकॉल अधिकारी एवं महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव डॉ. बिठ्ठल बिस्सा ने बताया कि पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह राजस्थानी वेशभूषा और परंपरागत संगीत से काफी प्रभावित थे। यही कारण था कि उनके लिए विश्वविद्यालय की तत्कालीन कुलपति चन्द्रकला पंड्या के घर बीस मिनट का सांस्कृतिक कार्यक्रम रखा गया था। लेकिन उन्होंने अपने पूर्व निर्धारित बीस मिनट के समय अवधि के बंधन को तोड़ते हुए करीब दो घंटे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का लुफ्त उठाया।


ग्रामीणों से थी खास दिलचस्पी
पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह ग्रामीण परिवेश से भी खास प्रभावित थे। यही कारण था कि जब भी वे बीकानेर आए उन्होंने गांव का दौरा जरूर किया। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में शिरकत करने के लिए जब वे बीकानेर पहुंचे तो विश्वविद्यालय की ओर से गोद लिए गए गांव कोटड़ी गए। जहां ग्रामीणों से उन्होंने न केवल बातें की, बल्कि उनकी समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश भी दिए। इसी प्रकार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के चलते उन्होंने डाइयां गांव का दौरा किया और वहां के जनजीवन को करीब से देखा।

लौटते हुए शिवलिंग लेकर गए
अपना चार दिवसीय बीकानेर दौरा पूरा करने के बाद जब पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह बीकानेर से जयपुर लौटे तो अपने साथ शिवलिंग लेकर गए। शिवलिंग को महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय की तत्कालीन कुलपति चन्द्रकला पड्या ने काशी से पूर्व राज्यपाल के लिए मंगवाया था।