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Lemon Price: नजर उतराई को भी मार गई महंगाई, नींबू-मिर्ची ने यहां भी खेल बिगाड़ा

Lemon Price: अगर नींबू-मिर्ची की पुरानी माला सड़क पर किसी वाहन अथवा पैरों के नीचे आ गई, तो मान्यता है कि नजर उतर गई है। दुबारा किसी की नजर न लगे।

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Lemon Price: नजर उतराई को भी मार गई महंगाई, नींबू-मिर्ची ने यहां भी खेल बिगाड़ा

Lemon Price: नजर उतराई को भी मार गई महंगाई, नींबू-मिर्ची ने यहां भी खेल बिगाड़ा

बृजमोहन आचार्य

बीकानेर. Lemon Price: नींबू-मिर्ची के टोटकों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। फिर भी समाज में नींबू-मिर्ची के टोटकों का खूब चलन है। बुरी नजर से बचने, घर की की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लोग इनके टोटकों को प्रत्येक शनिवार को आजमाते हैं। आप जब भी शनिवार को किसी रोड से गुजरेंगे, तो आपको सड़क पर नींबू-मिर्ची की पुरानी माला नजर आ जाएगी और नई माला किसी दुकान अथवा शोरूम, वाहनों तथा मकानों पर टंगी हुई दिखेगी। अगर नींबू-मिर्ची की पुरानी माला सड़क पर किसी वाहन अथवा पैरों के नीचे आ गई, तो मान्यता है कि नजर उतर गई है। दुबारा किसी की नजर न लगे।

इसे ध्यान में रखते हुए दुबारा नई माला कहीं न कहीं टंगी नजर आ ही जाएगी। प्रत्येक शनिवार को कई लोग नींबू-मिर्ची की माला टांगने को धंधा बनाकर सुबह-सुबह ही निकल जाते हैं। दोपहर तक माला टांगने का काम पूरा कर फ्री हो जाते हैं। लेकिन जब से नींबू के भावों ने दांतों को ज्यादा खट्टा करना शुरू किया है। तभी से इसकी माला भी महंगी हो गई है, लेकिन लोग टोटकों को देखते हुए इसे खरीदते जरूर हैं। यह सही है कि माला में नींबू की संख्या कम कर दी।


माला की दर 15 से 25 रुपए तक

जब से नींबू के भावों में उछाल आया है। तभी से नींबू-मिर्ची की माला भी महंगी हाे गई है। इस वजह से कई लोगाें ने तो इसे टांगना बंद कर दिया है और छोटा कोयला बांधने लगे हैं ताकि कोई नजर न लगे। नींबू-मिर्ची की माला इस समय पन्द्रह से पच्चीस रुपए प्रति माला बिक रही है। जबकि पूर्व में यह माला दस रुपए में मिलती थी। हालांकि एक-दो लोग यह माला दस रुपए में भी बेच रहे हैं, लेकिन उसमें नींबू छोटा है और हरापन लिए हुए है। माला में नींबू भी एक ही पिराने लगे हैं। जबकि मिर्ची किसी में चार तो किसी में पांच पिराेते हैं। जबकि पूर्व में भाव कमजोर होने के कारण दो नींबू पिरोए जाते थे और मिर्ची भी सात तक पिरोई जाती थी।

ग्राहकी हुई कमजोर

नींबू के भावों में तो तेजी आ गई लेकिन माला में ग्राहकी कमजोर होने लगी। पब्लिक पार्क स्थित शनिचर मंदिर के पुजारी मुकेश भार्गव तथा व्यवस्थापक सरदार सिंह ने बताया कि माला की ग्राहकी कमजोर हो गई। भावों में कमजोरी थी तो कोई व्यापारी दस माला भी ले जाता था। लेकिन अब एक-दो माला ही खरीद रहे हैं। सुनीता नामक महिला घूम-घूम कर लंबे समय से वाहनों तथा दुकानों पर नींबू-मिर्ची की माला टांगती है। उसने बताया कि कोई दस तो कोई पन्द्रह रुपए देता है। अगर अब नींबू के भावों में तेजी आई तो माला बेचना बंद कर दूंगी।

प्रतिष्ठानों व घरों पर माला टांगना टोटका

पंडित उत्तम शर्मा ने बताया कि प्रतिष्ठान को नजर न लगे और घर में सुख शांति रखने के लिए लोग शनि भगवान को खुश रखने के लिए प्रत्येक शनिवार को नींबू-मिर्ची की माला टांगते हैं।

नींबू ढाई सौ और मिर्ची साठ रुपए

बाजार में नींबू खुदरा भाव में ढाई सौ रुपए और मिर्ची 50 से 80 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रही है। इस समय मंडी में गुजरात तथा चेन्नई से नींबू के प्रति दिन करीब तीन सौ थैले आते हैं। एक थैले में 25 से 30 किलो की भराई होती है। इस समय फसल कमजोर होने के कारण भावों में तेजी आई है। जबकि मिर्ची की चौमूं से आवक हो रही है। प्रतिदिन आठ गाडियां आ रही हैं। थोक में इसके भाव 40 रुपए और खुदरा में भाव 50 से 80 रुपए हैं।


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