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फ्रोजन भ्रूण प्रत्यर्पण तकनीक से पैदा हुआ देश का पहला घोड़े का बच्चा, नाम रखा राज शीतल, वजन 20 किलोग्राम

सीमन को 7.5वें दिन फ्लश कर अनुकूलित क्रायोडिवाइस के उपयोग से विट्रिफाइ कर तरल नाइट्रोजन में जमाया गया। पूरे 2 महीने के बाद इसे पिघलाया और सिंक्रनाइज़ड सरोगेट घोड़ी में स्थानांतरित कर गर्भवती किया गया। इसके बाद घोड़ी ने बछेड़ा काे जन्म दिया है।

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राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र बीकानेर के वैज्ञानिकों के प्रयास से शनिवार को विट्रिफाइड (फ्रोजन सीमन) भ्रूण स्थानांतरण तकनीक के माध्यम से देश के पहले घोड़े के बच्चे (बछेड़ा) का जन्म हुआ। करीब 20 किलो वजन के इस स्वस्थ बछेड़ा का नाम ‘राज-शीतल’ रखा गया है। केंद्र के प्रभागाध्यक्ष डॉ. एससी मेहता ने बताया कि घोड़ी को घोड़े के जमा कर रखे वीर्य (फ्रोजन सीमन) से गर्भवती किया गया। सीमन को 7.5वें दिन फ्लश कर अनुकूलित क्रायोडिवाइस के उपयोग से विट्रिफाइ कर तरल नाइट्रोजन में जमाया गया। पूरे 2 महीने के बाद इसे पिघलाया और सिंक्रनाइज़ड सरोगेट घोड़ी में स्थानांतरित कर गर्भवती किया गया। इसके बाद घोड़ी ने बछेड़ा काे जन्म दिया है।

वैज्ञानिकों की इस टीम ने प्राप्त की सफलता

केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. टी राव तालुड़ी एवं टीम ने यह सफलता प्राप्त की है। इसमें डॉ. सज्जन कुमार, डॉ. आर के देदड़, डॉ. जितेंद्र सिंह, डॉ. एम कुट्टी, डॉ. एस सी मेहता, डॉ. टी के भट्टाचार्य एवं मिस्टर पासवान शामिल रहे। इस टीम ने इससे पहले मारवाड़ी घोड़े के 20 भ्रूण और जांस्कारी घोड़े के 3 भ्रूणों को सफलता पूर्वक विट्रिफाई करने में सफलता प्राप्त की है।

घोड़ों की घटती संख्या के बीच सकारात्मक संकेत

देश में घोड़ों की आबादी तेजी से घट रही है। 19वीं और 20वीं पशुधन गणना (2012-2019) के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में घोड़ों की संख्या में 52.71% की कमी आई है। ऐसे में घोड़ों की स्वदेशी नस्लों के संरक्षण के लिए तुरंत उपाय करने की आवश्यकता है। इसी के दृष्टिगत केंद्र स्वदेशी घोड़ों की नस्लों के संरक्षण के लिए कई तरह के प्रयास कर रहा है।