
Topic of thd day : पेंशनरों को जेनेरिक नहीं ब्रांडेड दवाईयां सरकारी अस्पतालों से मिले
बिलासपुर . प्रदेश में 80 हजार पेंशनर है। इन पेंशनरों को राज्य सरकार के सातवां वेतनमान का पेंशन लाभ नहीं मिल रहा है। कई बार राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा गया। लेकिन राज्य सरकार पेंशनरों के प्रति उदासीन रवैया अपना रखा है। छत्तीसगढ़ की अपेक्षा मप्र में पेंशनरों की सुविधाएं बेहतर है। छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ के प्रदेश महामंत्री अशोक ठाकरे ने बुधवार को 'पत्रिका टॉपिक ऑफ द डे में बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य के पेंशनरों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे है। इसी साल मार्च में पेंशनरों को सातवां वेतनमान ,भत्ते की मांग को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। लेकिन शासन की तरफ से अब तक कोई कारगर पहल नहीं की गई है।
ठाकरे ने कहा कि पेंशनरों को प्रत्येक माह मेडिकल भत्ता आठ सौ रुपए मिलता है। इससे कम से कम एक हजार रुपए प्रति माह किया जाना चाहिए । वहीं सरकारी अस्पतालों में पेंशनरों को प्रति माह आठ रुपए की दवाईयां दी जा रहीं है,इसे एक हजार रुपए तक की सीमा की जाए। साथ ही राज्य शासन पेंशनरों को दी जाने वाली जेनेरिक दवाईयों के स्थान पर ब्रांडेड कंपनियों की दवाईयां मुहैया कराएं। संघ के प्रदेश महामंत्री ने कहा छठवां वेतनमान का 32 माह का एरियर्स की राशि अब तक राज्य सरकार ने पेंशनरों को नहीं दी है। यह राशि तत्काल दिया जाए। छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ के प्रदेश महामंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य से मध्य प्रदेश में पेंशनरों की सुविधाएं बेहतर है। मप्र की सरकार ने पेंशनरों के महंगाई भत्ते में हाल ही में इजाफा करके राहत दिया है। ठाकरे ने कहा कि रेलवे के समान राज्य के पेंशनधारियों को बसों में पचास फीसदी की रियायत के लिए पहल करनी चाहिए ।
Published on:
23 May 2018 03:03 pm
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