आंख मूंद जनता की आंखों में झोंकी धूल 75 लाख की जगह की करोड़ों की अनुशंसा

Amil Shrivas

Publish: Nov, 15 2017 11:22:39 (IST)

Bilaspur, Chhattisgarh, India
आंख मूंद जनता की आंखों में झोंकी धूल 75 लाख की जगह की करोड़ों की अनुशंसा

जिले के प्रभारी मंत्री को प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में 25-25 लाख रुपए के विकास कार्य के लिए कार्य और राशि की अनुशंसा करने का अधिकार है।

बिलासपुर . आम जनता को भरमाने के लिए विधायकों ने अपने -अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास योजना की राशि आवंटित करने के लिए जमकर दरियादिली दिखाई है। राशि की तय सीमा को लांघकर कार्य स्वीकृत कर दिए गए है। फंड नहीं होने पर अनुशंसित कई कार्यों का रुकना तय है। विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के लिए विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के तहत एक वित्तीय वर्ष में 75-75 लाख रुपए देने का प्रावधान है। जिले के प्रभारी मंत्री को प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में 25-25 लाख रुपए के विकास कार्य के लिए कार्य और राशि की अनुशंसा करने का अधिकार है। कुल मिलाकर एक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में एक करोड़ रुपए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में जारी किए जाते हैं।

राशि 75 लाख, कार्य मंजूर किए 1.35 करोड़ से अधिक : जिले में विधायक निधि से निर्माण कार्य के लिए तखतपुर के विधायक व संसदीय सचिव राजूसिंह क्षत्री ने सबसे अधिक दरियादिली दिखाई है। क्षत्री 30 कार्य के लिए 1 करोड़ 35 लाख 83 हजार रुपए स्वीकृत कर चुके हैं। लेकिन उनके पास फंड की सीमा 73.50 लाख रुपए ही है। इस विधान सभा क्षेत्र के लिए प्रभारी मंत्री अजय चंद्राकर ने अपने मद की राशि 24.50 लाख रुपए अब तक जारी नहीं की है।
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1.51 करोड़ के कार्य स्वीकृत कर दिए : मस्तूरी विधान सभा क्षेत्र के विधायक दिलीप लहरिया की विधायक निधि व प्रभारी मंत्री निधि की राशि क्रमश: 73.50 एवं 24.50 लाख रुपए जारी हो चुकी है। विधायक ने इस राशि से 40 और प्रभारी मंत्री ने 4 कार्यों की स्वीकृति दी है। लेकिन विधायक ने तय सीमा से अधिक 1 करोड़ 27 लाख रुपए के निर्माण कार्य मंजूर कर दिए है। हालांकि प्रभारी मंत्री ने तय सीमा 24.50 लाख रुपए ही स्वीकृत किए हैं।
सांसद निधि में नहीं हैं बंधन : सांसद निधि से स्वीकृत कार्य अगले वित्तीय वर्ष के लिए मान्य हैं। इसलिए बीते वित्तीय वर्ष की अनुंशसा आगामी वित्त वर्ष में जारी रहती हैं।
जनता को भरमाने का नुस्खा : विधायक निधि व प्रभारी मंत्री के निधि की सीमा तय है। यह राशि राज्य सरकार द्वारा जारी की जाती है। इसलिए यह एक ही वित्तीय वर्ष के लिए मान्य रहती है। जितनी राशि उनके मद में हंै,उतने के ही कार्य स्वीकृत होंगे। राशि समाप्त होने पर तय सीमा से अधिक की अनुशंसाएं स्वमेव निरस्त हो जाती हैं। नए वित्तीय में सभी पुरानी स्वीकृति समाप्त हो जाएंगी।
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मरवाही में विधायक, मंत्री ने सीमा पार की : मरवाही विधानसभा क्षेत्र में विधायक अमित एेश्वर्य जोगी ने तय सीमा को पार करते हुए 81 लाख 50 हजार रुपए के 41 कार्यों को स्वीकृति दी है। वहीं प्रभारी मंत्री ने 8 कार्यों में 49 लाख रुपए की मंजूरी दी है।
कोटा में विधायक आगे, मंत्री सीमा पर : कोटा विधानसभा क्षेत्र में विधायक डॉ. रेणु जोगी ने तय सीमा 73.50 लाख रुपए से अधिक 87 लाख 50 हजार रुपए के 36 कार्य स्वीकृत कर दिए है। वहीं प्रभारी मंत्री ने इस विधान सभा क्षेत्र में तय सीमा की राशि 24.50 लाख रुपए की ही मंजूरी दी है।
बिलासपुर में डेढ़ लाख अधिक : बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक व नगरीय कल्याण मंत्री अमर अग्रवाल ने निधि की तय सीमा से केवल डेढ़ लाख रुपए अधिक के कार्य स्वीकृति किए है। अग्रवाल ने 75 लाख रुपए में ११ कार्य को मंजूरी दी है। लेकिन इस विधान सभा क्षेत्र में प्रभारी मंत्री ने अब तक अपनी निधि से एक भी विकास कार्य के लिए राशि का आवंटन नहीं किया है।
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बिल्हा भी पीछे नहीं : बिल्हा के विधायक सियाराम कौशिक अपने निर्वाचन क्षेत्र में 91 लाख 40 हजार रुपए की राशि मंजूर कर चुके है। यह राशि 37 कार्य के लिए जारी की गई है। वहीं प्रभारी मंत्री ने अब तक इस विधानसभा क्षेत्र के लिए राशि नहीं दी है।
बेलतरा में दिखाई कंजूसी : बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक व विधानसभा उपाध्यक्ष बद्रीधर दीवान में अब तक 20 कार्यों के लिए केवल 48 लाख 60 हजार रुपए मंजूर किए है। उनकी निधि की राशि अभी करीब 23 लाख रुपए बची है। वहीं प्रभारी मंत्री ने इस विधान सभा क्षेत्र में अपनी निधि की राशि से किसी प्रकार का कार्य आवंटन नहीं किया है।
पत्रिका व्यू...-जनता से धोखा न करें : विधायक निधि और उसकी अनुशंसा की सीम का ज्ञान सभी विधायकों को होता है। उसके बाद भी बिना सोचे-समझे अनुशंसा या तो क्षेत्र के लोगों की मांग पर उनको संतुष्ट करने के लिए की जा रही हैं या फिर विधायक ही मनमर्जी से। जनता की आंख में धूल झोंककर ज्यादा काम कराने का तमगा पाने के लिए यह कर रहे हैं। विधायकों को लगता होगा कि अपनी ओर से अनुशंसा कर लोगों को संतुष्ट कर दिया जाए, बाकी बाद में देखी जाएगी। अगर इस मंशा से ऐसा किया जा रहा है तो यह जनता के साथ सरासर धोखा है।
वित्त में वर्ष में नए सिरे से राशि देने का है प्रावधान : विधायकों व प्रभारी मंत्री के लिए तय निधि की राशि ही अनुशंसा में स्वीकृत होंगी। जिनकी अनुशंसा तय सीमा से अधिक है, वह वित्त वर्ष समाप्त होने के साथ ही समाप्त हो जाएंगी। नए वित्त वर्ष में नए सिरे से अनुशंसा देने का प्रावधान है।
सुरेश कुमार कश्यप, संयुक्त संचालक, जिला योजना-सांख्यिकी समिति, बिलासपुर

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