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Baby care Tips: 6 माह तक बच्चे काे पिलाएं मां का दूध, फिर दें ये आहार

Baby Care Tips: घर में नन्हा मेहमान खुशियों के साथ जिम्मेदारियां भी लाता है। शुरुआत में इसकी खास देखभाल बेहद जरूरी है ताकि वह रोगों से दूर रहे और सेहतमंद बने...

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Food allergies in 18 to 20 percent of children

Food allergies in 18 to 20 percent of children

Baby Care Tips: घर में नन्हा मेहमान खुशियों के साथ जिम्मेदारियां भी लाता है। शुरुआत में इसकी खास देखभाल बेहद जरूरी है ताकि वह रोगों से दूर रहे और सेहतमंद बने। इन जिम्मेदारियों में मां का रोल बहुत अहम होता है। जानते हैं कुछ ऐसी बातों के बारे में जिसकी मदद से नवजात हैल्दी और हैप्पी रह सकता है।

6 माह तक मां ही फीड कराए
नवजात को करीब 6 माह तक मां का दूध पिलाना जरूरी होता है। मां के दूध में कोलोस्ट्रम नामक पदार्थ होता है जिसमें सभी पोषक तत्त्व होते हैं जो उसके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

हल्की डाइट होती है हैल्दी
जन्म के छह माह बाद बच्चे को पचाने में हल्के आहार जैसे चावल, मूंग दाल का सूप, दाल का मांड, खिचड़ी, मैश किए फल और उबली सब्जियों का सूप दे सकते हैं। बच्चे को मीठा या नमकीन न खिलाएं। इससे पेट संबंधी दिक्कत हो सकती है।

कपड़ों में न हो संक्रमण
नवजात को नरम व हल्के कपड़े पहनाएं। शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए हमेशा कपड़े पहनाकर रखें। कम वजन के बच्चे के हाथ, पैर, सिर को हमेशा ढंककर रखें। कपड़ों में साबुन रहने पर बच्चों को चकत्ते हो सकते हैं। बच्चे को डायपर पहनाने से पहले क्रीम या तेल लगाएं। संक्रमण से बचाने के लिए कुछ देर तक बच्चे को बिना डायपर के भी रहने दें।

कमरे का तापमान
नवजात बेहद नाजुक होते हैं। शिशु बाहरी तापमान के अनुरूप खुद को नहीं ढाल पाते हैं। इसलिए हमेशा ढंककर रखें। बच्चा जिस कमरे में हो उस कमरे का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही होना चाहिए।

बच्चे की मालिश जरूरी
जन्म के समय नवजात की हड्डियां नाजुक होती हैं। ऐसे में हड्डियों को मजबूत करने के लिए मां को चाहिए कि वह बच्चे की मालिश जरूर करे। डॉक्टर से बात कर बाजार में उपलब्ध बेहतर तेल चुन सकती हैं।

सर्दियों में खुले में नहलाएं
नवजात के लिए धूप जरूरी होती है। सर्दियों में उसे कुछ देर धूप में रखें और खुले में नहलाएं। धूप से शिशु की हड्डियां मजबूत होती हैं।

अधिक रोए तो डॉक्टर से मिलें
नवजात का रोना हमेशा चिंता की बात नहीं होती है। भूख लगने, बिस्तर गीला होने पर रोते हैं। लगातार तीन घंटे रोने पर पेट, जुकाम के कारण कान में दर्द हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

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