11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

इन कारणों से होता है कमर दर्द, ऐसे पहचानें

गलत जीवनशैली के कारण स्पाइनल कॉर्ड की वर्टिब्रा एल थ्री या एल फोर, सी फोर और सी फाइव में दर्द की समस्याएं बढ़ रही हैं। हर पांचवें व्यक्ति को कंधे, पीठ या कमर के निचले हिस्से में खिंचाव और दर्द रहता है।

less than 1 minute read
Google source verification
back pain

स्पाइन में दर्द शुरू होने पर व्यक्ति को सावधानी के तौर पर पहले दो दिन आराम करना चाहिए। हीट और कोल्ड थेरेपी के साथ दवा, लोशन, स्प्रे दर्द की जगह लगाने से आराम मिलता है। इसके बाद भी न्यूरो और ऑर्थो स्पेशलिस्ट से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
ऐसे पहचानें स्लिपडिस्क के लक्षण
गर्दन व कमर में दर्द समय के साथ बढ़ना, हाथ और पैर में कमजोरी, पेशाब व मल त्याग पर नियंत्रण खत्म होना, हाथ पैर में सूनापन व झनझनाहट होना, चलने में परेशानी होना और कंपन होता है।
सर्जरी से पहले बीमारी की गंभीरता जानें
स्लिपडिस्क की समस्या और उसकी गंभीरता को जानने के लिए एमआरआई और सीटी स्कैन जांच कराई जाती है। इस जांच की मदद से चिकित्सक ये पता करते हैं कि स्पाइन के किस हिस्से में परेशानी हुई है जिसके आधार पर इलाज के लिए आगे की रणनीति बनाई जाती है।
सर्जरी में नहीं रिस्क
एक्सपर्ट के अुनसार असहनीय दर्द से आराम के लिए ऑपरेशन कारगर है, हालांकि इसको लेकर लोगों में गलत धारणा है कि रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन से लकवा हो जाता है। ऐसा कुछ भी नहीं है। हकीकत ये है कि ऑपरेशन के बाद वर्षो से हो रहे दर्द में 80 से 90 फीसदी आराम मिल जाता है और बीमारी आगे नहीं बढ़ती है। फिजियोथेरेपी तभी तक कारगर है जब तक स्पाइनल कॉर्ड व नसों पर दबाव कम होता है। दर्द से राहत के लिए डॉक्टरी सलाह के बाद ही एक्पर्ट से फिजियोथेरेपी करानी चाहिए।