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मासिक धर्म, गर्भधारण, स्तनपान और मेनोपॉज में कैल्शियम की कमी को एेसे करें पूरा

कैल्शियम का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हमारी हड्डियों और दांतों में और एक प्रतिशत हिस्सा रक्त और मांसपेशियों में होता है।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Nov 07, 2019

मासिक धर्म, गर्भधारण, स्तनपान और मेनोपॉज में कैल्शियम की कमी को एेसे करें पूरा

इसका लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हमारी हड्डियों और दांतों में और एक प्रतिशत हिस्सा रक्त और मांसपेशियों में होता है।,इसका लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हमारी हड्डियों और दांतों में और एक प्रतिशत हिस्सा रक्त और मांसपेशियों में होता है।,इसका लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हमारी हड्डियों और दांतों में और एक प्रतिशत हिस्सा रक्त और मांसपेशियों में होता है।

कैल्शियम न केवल हड्डियों के लिए बल्कि शरीर की हर कोशिका, नसों, रक्त, मांसपेशियों और हृदय के लिए बहुत आवश्यक है। शरीर में अन्य खनिजों के मुकाबले कैल्शियम सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसका लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हमारी हड्डियों और दांतों में और एक प्रतिशत हिस्सा रक्त और मांसपेशियों में होता है।

हाथ-पैर में झुनझुनी -
कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा मांसपेशियों में ऐठन, याद्दाश्त में कमी, शरीर सुन्न होना और हाथों- पैरों में झुनझुनी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

मेनोपॉज में ज्यादा जरूरत -
कैल्शियम गर्भस्थ शिशु व मां दोनों के लिए जरूरी है। यह गर्भवती महिलाओं का ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखता है। गर्भवती महिला को 2500 मिग्रा. से ज्यादा कैल्शियम नहीं लेनी चाहिए। मासिक धर्म, गर्भधारण, स्तनपान और मेनोपॉज के दौरान कैल्शियम कमी हो जाती है। इसलिए इसे नियमित लेना जरूरी है।

खानपान से ले सकते -
एक टी स्पून तिल में करीब 88 मिग्रा. कैल्शियम होता है। इसे सलाद, सूप में इस्तेमाल किया जा सकता हैं।
एक गिलास उबलते पानी में एक चम्मच जीरा मिलाएं। पानी को ठंडा करके दिन में दो से चार बार पीएं। इससे शरीर में कैल्शियम की कमी दूर हो सकती है।
250 मिग्रा. गुग्गुल, गिलोय की पत्तियां, जड़ व तना और एंटीऑक्सीडेंट युक्त अश्वगंधा का प्रयोग कर सकते हैं।

कितनी जरूरत-
1 से 3 साल के बच्चे को 500मिग्रा.
4 से 8 साल के बच्चे को 800 मिग्रा.
9 से 18 साल के बच्चे को 1300
19 से 50 की उम्र में 1000 मिग्रा.
51 साल की उम्र के बाद 1200
महिलाओं में मेनोपॉज के बाद 1500 मिग्रा.
दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए 1200 मिग्रा. प्रतिदिन जरूरी।

सुबह की धूप लें -
विटामिन डी लेने के लिए धूप में बैठें, उस समय शरीर पर किसी प्रकार का तेल या क्रीम नहीं लगाएं। सुबह के समय धूप में आधी बाजू और निक्कर पहन कर करीब आधा घंटा बैठने से विटामिन डी की प्रतिपूर्ति हो जाती है। पौष्टिक आहार के साथ शरीर में इसकी ज्यादा कमी होने पर सप्लीमेंट के रूप में एक दिन में एक कैल्शियम टेबलेट डॉक्टरी सलाह से ली जा सकती है।

परामर्श भी जरूरी -
डॉक्टरी सलाह पर कैल्शियम की कमी पूरी करने और शरीर को अतिरिक्त कैल्शियम देने के लिए बायोकेमिकल फॉर्मूले से बनी कैलकेरिया फोस डॉक्टरी सलाह से ली जा सकती है। इसमें कैल्शियम फॉस्फेट होता हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। जरूरी जांच और चिकित्सक की परामर्श के बिना कैल्शियम की टेबलेट नहीं लें।

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