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प्रेग्नेंसी में न करें ये गलती, पड़ सकती है भारी

टीका मानव जाति के लिए औषधियों में सबसे अच्छी शुरुआती सफलताओं में से एक है। टीके रोकथाम वाली कई बीमारियों से संभावित मां और भू्रण की रक्षा करते हैं
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Amanpreet Kaur

Sep 12, 2018

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टीका मानव जाति के लिए औषधियों में सबसे अच्छी शुरुआती सफलताओं में से एक है। टीके रोकथाम वाली कई बीमारियों से संभावित मां और भू्रण की रक्षा करते हैं। टीकाकरण प्रसवपूर्व देखभाल का एक अभिन्न हिस्सा है। गर्भावस्था के दौरान उचित टीकों के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, इस चरण में लाइव अटेंचुएटेड वायरल वैक्सीन नहीं दी जाती हैं। उसके बजाय, नॉनवायेबल एंटीजन की सिफारिश की जाती है, क्योंकि ये गर्भ को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ टीके यहां बताएं जा रहे हैं जो आपको व बच्चे को पूरी तरह सुरक्षित रखेंगें।

इन्फ्लुएंजा वैक्सीन

इन्फ्लुएंजा गंभीर बीमारी नहीं लेकिन गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशु में गंभीर जटिलताओं का कारण जरूर बन सकती है। इसलिए उन्हें निष्क्रिय इन्फ्लूएंजा टीका देने की सलाह दी जाती है। लाइव इंट्रानेजल को छोड़ बाकी सभी प्रकार के फ्लू टीकों को गर्भावस्था के साथ-साथ पोस्टपार्टम में भी सुरक्षित है।

टीडेप वैक्सीन

हर साल, तीन माह से कम उम्र के अनेक शिशु पर्टुसिस (जिसे खांसी के रूप में भी जाना जाता है) से पीडि़त होते हैं। यह वह अवस्था है जब टीडेप का टीका सहायक होता है। यह टिटनेस व डिप्थीरिया से बचाता है। चूंकि दो महीने से कम उम्र के शिशुओं के लिए टीडेप टीके की सिफारिश नहीं की जाती, इसलिए अच्छा यह है कि माता-पिता का वैक्सीनेशन किया जाए।

यह प्लेसेंटा के माध्यम से मां से गर्भ में पहुंच कर नवजात में एंटी-पर्टुसिस एंटीबॉडी को उत्तेजित करता है। हालांकि गर्भावस्था की किसी भी तिमाही के दौरान यह दिया जा सकता है, परंतु इस टीके को देने का आदर्श समय गर्भ के 27वें और 36वें सप्ताह के बीच है।

एमएमआर वैक्सीन

यह टीका खसरा, मम्प्स और रूबेला के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। ये बीमारियां नवजात शिशुओं में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती हैं। गर्भधारण की योजना बनाने से चार सप्ताह पहले या प्रसव के तुरंत बाद एक लाइव एटेनुएटिड वाइरल खुराक की सिफारिश की जाती है। व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार टीकों की कितनी जरूरत है, इसके बारे में डॉक्टर से सलाह लें।