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जंकफूड के जहर से सेहत खराब न करें

जंकफूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है लेकिन स्वाद के चक्कर में लोग सेहत को भूल रहे हैं, नतीजतन 50 साल की उम्र के बाद होने वाले रोग अब बच्चों और युवाओं में भी होने लगे हैं। जानते हैं इसके बारे में।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Feb 17, 2019

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जंकफूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है लेकिन स्वाद के चक्कर में लोग सेहत को भूल रहे हैं, नतीजतन 50 साल की उम्र के बाद होने वाले रोग अब बच्चों और युवाओं में भी होने लगे हैं। जानते हैं इसके बारे में।

जंकफूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है लेकिन स्वाद के चक्कर में लोग सेहत को भूल रहे हैं, नतीजतन 50 साल की उम्र के बाद होने वाले रोग अब बच्चों और युवाओं में भी होने लगे हैं। जानते हैं इसके बारे में।

जंकफूड है जहर -
बर्गर, नूडल्स और पिज्जा आदि को बनाने के लिए मैदा, अधिक मात्रा में नमक, तेल व मसालों का प्रयोग होता है, साथ ही साफ-सफाई भी संदिग्ध रहती है। ऐसा जंकफूड पेट तो भरता है लेकिन इससे पोषक तत्व नहीं मिल पाते।

रोगों का खतरा -
विभिन्न स्टडी बताती हैं कि लगातार ऐसा भोजन करते रहने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं जिससे मोटापा, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं होने लगती हैं। जो बच्चे ऐसी चीजें खाते हैं उनका दिमागी और शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है, एकाग्रता में कमी, तनाव व पेट संबंधी तकलीफ होने लगती हैं।

घर का बना -
जब घर पर इन्हें बनाएं तो मैदे की जगह आटा या रागी के आटे का प्रयोग करें। नमक, चीनी व अन्य मसाले सीमित मात्रा में हों, सब्जियां ताजी हों। घर पर बनीं नूडल्स, चाट आदि को हफ्ते में दो बार खाया जा सकता है।

विकल्प आजमाएं -
जंकफूड का विकल्प इडली, डोसा, खमन, पोहा, फलों की चाट या अंकुरित अनाज भी हो सकते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर ये खाद्य पदार्थ सेहत व स्वाद दोनों देते हैं। इन्हें अधिक सेहतमंद बनाने के लिए वैजीटेबल इडली बना सकते हैं या पोहे में मूंगफली आदि का प्रयोग कर सकते हैं। अंकुरित अनाज में प्याज, खीरा व टमाटर डालकर फाइबर की मात्रा को भी बढ़ाया जा सकता है। रेशेदार भोजन हमारी आंतें अच्छे से पचा लेती हैं।