त्वचा की एलर्जी या संक्रमण को हल्के में न लें, पहचानें बीमारी के लक्षण

त्वचा की एलर्जी या संक्रमण को इग्नोर न करें। इसकी वजह जानने की कोशिश करें। यदि यह समस्या बार बार हो रही है तो आप बीमारी की पहचान कर इलाज लें। ताकि कोई बड़ी समस्या न हो।

By: Ramesh Singh

Published: 23 Jun 2020, 07:52 PM IST

हमारी त्वचा पर लाल रंग की सतह के रूप में उभरती है जिसमें स्कैल्प (सिर की सतह), हथेलियां, तलवे, कोहनी, घुटने और पीठ आदि अंग प्रभावित होने से सोरायसिस होती है।

सबसे ऊपरी परत एपिडर्मिस

त्वचा की सबसे ऊपरी परत एपिडर्मिस पर होती है। यह बीमारी आनुवांशिकता, एलर्जी या किसी प्रकार के संक्रमण से यह परेशानी हो सकती है। इसके अलावा मौसम में होने वाले बदलाव भी इसका कारण बनते हैं।
त्वचा रूखी होती है, मोटाई बढ़ जाती है
लक्षण : इस रोग से प्रभावित हिस्से की चमक कम होने से त्वचा रूखी, फटी और मोटी दिखाई देती है व उसमें खुजली भी होती है। सोरायसिस के क्रॉनिक व गंभीर होने पर करीब 40 प्रतिशत रोगियों में जोड़ों में दर्द व सूजन जैसे लक्षण भी पाए जाते हैं। इस अवस्था को सोराइटिस आर्थराइटिस कहते हैं। यह बीमारी सर्दियों में ज्यादा परेशान करती है।
होम्योपैथी में भी है कारगर इलाज
होम्योपैथी एक्सपर्ट का कहना है कि सोरायसिस के उपचार में बाह्य प्रयोग के लिए एंटिसोरियेटिक क्रीम/ लोशन/ ऑइंटमेंट की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन जब बाह्योपचार से लाभ न हो तो एंटीसोरिक और सिमटोमेटिक होम्योपैथिक औषधियों का प्रयोग जरूरी होता है। लक्षणानुसार कुछ होम्योपैथिक औषधियां जैसे मरक्यूरस सौल, लाईकोपोडियम, सल्फर, सोराइन्म, आर्सेनिक अल्ब्म, ग्रफाइट्स आदि दी जाती हैं। होम्योपैथी में शारीरिक व मानसिक लक्षणों को देखने के बाद ही उपचार किया जाता है इसलिए इन दवाओं का प्रयोग विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।

Ramesh Singh Desk
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