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बच्चों की हड्डियां कमजोर होती हैं। ये बड़ी आसानी से मुड़ जाती हैं। इसलिए खेलते हुए या अन्य किसी वजह से गिरने पर इनके टूटने या फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है। ऐसे में उस अंग में दर्द और सूजन आ जाती है।
किस स्थिति में परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है?
गिरने से अधिक तर बच्चों की कोहनी, घुटने, कलाई व कंधों आदि जॉइंट्स के टूटने का डर रहता है। कई बार बच्चों की हड्डी एक तरफ से टूट जाती है लेकिन वह दूसरी तरफ से ठीक रहती है। ऐसे में कुछ लोग दर्द व सूजन को सामान्य चोट मानकर घरेलू उप चार देने लगते हैं। ऐसा करना बच्चे को परे शानी में डाल सकता है । इस स्थिति में इलाज में जितनी अधिक देरी होती है हड्डी के जुड़ाव में उतना ही समय लगता है। साथ ही हड्डी में टेढ़ापन व उस अंग के छोटे-बड़े होने का खतरा भी बढ़ सकता है ।
बच्चों में फै्रक्चर का खतरा किस उम्र में अधिक होता है?
10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में यह आशंका अधिक रहती है।
फै्रक्चर होने पर फिजियोथैरेपी कितनी जरूरी होती है?
प्लास्टर चढऩे व कटने, दोनों स्थितियों में फिजियो थैरेपी जरूरी होती है । दोनों स्थितियों में मरीज को अलग-अलग तरह के व्यायाम कराए जाते हैं जो उस अंग को सामान्य स्थिति में लाने के लिए होते हैं ।
किस तरह की साव धानी बरतें ?
किसी अंग में सूजन या अधिक दर्द होने पर देरी किए बगैर डॉक्टर को दिखाएं। घरेलू उप चार न आज माएं क्योंकि जॉइंट की हड्डी टूट ने पर अगर बच्चे को इलाज मिलने में एक हफ्ते की भी देरी हुई तो उस अंग में विकार आने की आशंका बढ़ जाती है । बच्चों को दूध व दूध से बने पदार्थ अधिक से अधिक दें ताकि उनकी हड्डियां मजबूत बनी रहें ।
Published on:
25 May 2018 04:55 am
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