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दिन में 2-3 बार ही आंखें धोएं, नहीं ताे हाे जाएगी ये परेशानी

आंखों में मौजूद प्राकृतिक चिकनाई (नमी रखने वाले आंसू) इसे सुरक्षित रखती है

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दिन में 2-3 बार ही आंखें धोएं, नहीं ताे हाे जाएगी ये परेशानी

आंखों में मौजूद प्राकृतिक चिकनाई (नमी रखने वाले आंसू) इसे सुरक्षित रखती है। यह नमी एंटीसेप्टिक की तरह काम करती है जो आंखों को संक्रमण से बचाने के साथ इसे साफ भी रखती है। लेकिन बार-बार आंखों को धोने से नमी कम होने के कारण कॉर्निया प्रभावित हो सकता है। जिससे रोशनी कम हो सकती है। दिन में 2-3 बार से ज्यादा आंखों को न धोएं।

एंटीएलर्जिक दवाएं
आमतौर पर सर्दी-जुकाम में ली जाने वाली एंटीएलर्जिक दवाओं का असर भी आंखों पर पड़ता है। इनमें मौजूद कुछ खास रासायनिक तत्त्व नमी बनाने वाले आंसुओं के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। नतीजतन आंसू कम बनना, धुंधला दिखना, आंखों में खुजली की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक इन दवाओं का इस्तेमाल करने से कॉर्निया पर भी असर पड़ सकता है।

आंखों को दें आराम
लगातार कम्प्यूटर, मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर काम करते या देखते समय लोग पलकें कम झपकाते हैं। इससे आंखों की नमी सूखने लगती है। आंखों में जलन, पानी आना और लाल होना जैसे लक्षण सामने आते हैं। कई बार धुंधला दिखने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में इस दौरान 5-5 मिनट के अंतराल पर एक-दो सेकंड के लिए आंखें बंद करें। या फिर 40-45 मिनट पर बे्रक जरूर लें। खासकर रात में स्क्रीन देखने से परहेज करें क्योंकि इससे नींद भी प्रभावित होती है।

लंबे समय तक आईड्रॉप
अक्सर डॉक्टर कुछ दिनों के लिए आईड्रॉप डालने की सलाह देते हैं, लेकिन आईड्रॉप बच जाने पर लोग उसे आगे भी प्रयोग करते रहते हैं। ऐसा न करें, क्योंकि आईड्रॉप को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बीकेसी कैमिकल मिलाया जाता है।जो ड्रायआई सिंड्रोम का कारण बन सकता है।

नोट- आंख में धूल-मिट्टी पडऩे पर इसे छींटे मारकर धोएं वर्ना आंखों में संक्रमण या कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो सकता है।