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मसूड़े घिसने से दांतों में लगता ठंडा-गर्म

दांतों में दर्द, ठंडा-गर्म लगना, और मुंह में दुर्गंध जैसी समस्याओं की अनदेखी न करें।

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मसूड़े घिसने से दांतों में लगता ठंडा-गर्म

40 की उम्र के बाद मुंह के कैंसर का बड़ा कारण तम्बाकू चबाना
80 प्रतिशत लोग मुंह से आने वाली दुर्गंध के साथ दांतों की अन्य समस्या से पीडि़त हैं। 40 की उम्र के बाद मुंह के कैंसर का बड़ा कारण तम्बाकू चबाना और शराब पीना होता है।
चमचमाते दांत हों तो स्माइल अलग छाप छोड़ती है। लेकिन कई कारणों से दांतों की समस्याएं बढ़ रही हैं। हार्ड ब्रश का इस्तेमाल, सुपारी-गुटखा चबाना व दांतों की नियमित रूप से सफाई नहीं करने से भी दांत व मसूड़े खराब हो जाते हैं। दांतों में पायरिया होने से मसूड़े नीचे चले जाते हैं जिससे दांतों की जड़ें निकल आती हैं और ठंडा-गर्म महसूस होने लगता है। गुटखे व सुपारी से दांतों में दरार पड़ जाती है और सेंसिविटी बढ़ती है। विशेषज्ञ दांतों की स्थिति देखकर स्केलिंग, आरसीटी, इम्प्लांट, ब्रिज आदि की सलाह देते हैं।
टेढ़े-मेढ़े दांत
दांत टेढ़े-मेढ़े हैं तो भोजन दांतों में चिपक जाता है। इनके इलाज दांतों में तार (ब्रेसेज) लगाकर करते हैं। दांत ठीक होने में 6 माह से 2 वर्ष तक लग जाते हैं।
दांत टूटना
दांतों का टूटना एक आम समस्या है। इसके होने पर फिलिंग, कैपिंग लगाना, रूट कैनाल या इंप्लांट कर इलाज किया जाता है।
कैविटी
दांत घिसने, टूटने या सडऩ से कैविटी होती है। ये दांतों की सतह पर बैक्टीरिया व प्लाक से होती है। इसके होने पर फ्लोराइड ट्रीटमेंट, फिलिंग या दांत निकालकर इंप्लांट से ठीक किया जाता है।


ऐसेे मिलेगा आराम
मसूड़े: इसमें सूजन से दांतों की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में इसकी देखरेख जरूरी है। इसके लिए सुहागा व फिटकरी (500 मिलिग्राम) को एक गिलास पानी मेें मिला लें। इससे कुल्ला करने से आराम मिलता है।
ठंडा-गर्म लगना: दांत दर्द, ठंडा-गर्म लगने से दशमूल व तणपंचमूल पाउडर (दस ग्राम) को दो गिलास पानी में डालें। फिर इसे उबालें। जब पानी एक गिलास रह जाए तो उसको छान लें। ठंडा करके इसको पीने से लाभ होगा।
रखें ध्यान
दांतों की देखभाल की जाए तो वे स्वस्थ्य रहते हैं। इनकी देखरेख न करने से उनमें कई तरह की समस्याएं हो जाती हंै। चॉकलेट, केक, मिठाइयां ज्यादा खाने व ब्रशिंग नहीं करने से दांतों में कीड़े लग जाते हंै। ज्यादा चाय-कॉफी पीने व धूम्रपान से दांत पीले हो जाते हैं। इससे दांतों के इनेमल को नुकसान होता है। कुछ लोग दांतों को आपस में रगड़ते (पीसने) हैं। इससे दांत कमजोर होते हैं।
त्रिफला, शहद उपयोगी
आयुर्वेदिक दवाएं दांतों के रोगों के इलाज में कारगर हैं। इन्हें विशेषज्ञ की सलाह से लें। केश्वर गुगलू, त्रिफला गुगलू, मुलेठी पाउडर को शहद में मिलाकर मसूड़ों पर लगाने एवं दशन संस्कार चूर्ण से दांत साफ करने से दांत की समस्याएं ठीक होती हैं।
आयुर्वेद में भी होती आरसीटी
आयुर्वेद में दांतों की आरसीटी होती है। इसमें गुड़ को मधुमक्खियों केे छत्ते वाले मोम के साथ दांतों में भरा जाता है। हालांकि ये फिलिंग लम्बे समय के लिए नहीं होती है।
डॉ. अंजली कपूर, दंत रोग विशेषज्ञ जयपुर
डॉ. गुलाब चंद पमनानी, आयुर्वेद विशेषज्ञ, जयपुर