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बॉडी को फिट व लचीला बनाता जिम्नास्टिक्स

जिम्नास्टिक्स यानी स्ट्रेंथ, फ्लैक्सिबिलिटी और बैलेंस का तालमेल। एक जिम्नास्ट के शरीर में ये तीनों खासियतें होना जरूरी है। एक राज्यस्तरीय जिम्नास्ट बनने में लगभग 7 और राष्ट्रस्तरीय बनने में 10 साल लगते हैं। इसकी तैयारी आठ साल की उम्र से शुरू होती है। एक जिम्नास्ट की बॉडी हर तरह के स्पोट्र्स के लिए तैयार होती है।

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Gymnastics

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खुद को कैसे इस खेल के लिए तैयार करें
रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला दीपा करमाकर ने जिम्नास्ट कैटेगरी में इतिहास रचा है। 'फ्लैट फीट' की दिक्कत होने के बावजूद रोजाना कई घंटों की लगातार मेहनत से दीपा ने यह मुकाम हासिल किया है। जानिए खुद को कैसे इस खेल के लिए तैयार करें।
तीन लेवल जो बनाएंगे परफेक्ट जिम्नास्ट
1 बिगनर
इस स्तर पर 8 साल की उम्र से ही तैयारी शुरू की जाती है। वॉर्मअप से शुरुआत कर एक्सरसाइज में रोलिंग, जंपिंग, बैलेंसिंग को शामिल किया जाता है।
समय : छह माह तक रोजाना तीन घंटे ये व्यायाम जरूरी हैं। इस समयावधि का घटना-बढऩा खिलाड़ी की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।
बदलाव : शरीर में लचीलापन आने से अगले स्तर के लिए खिलाड़ी फिट हो जाता है।
2 एडवांस
समय: 4 साल।
बदलाव : जिम्नास्ट के लिए शरीर तैयार।
इस लेवल पर महिला को 4 और पुरुष को 6 तरह के व्यायाम कराए जाते हैं। दोनों वर्ग में फ्लोर एक्सरसाइज व वॉल्टेन टेबल कॉमन रहती हैं। यह स्तर खिलाड़ी को शारीरिक और मानसिक तौर पर खेल के लिए तैयार करता है।
3. मास्टर
दर्द सहने की क्षमता : एक्सरसाइज के दौरान होने वाले दर्द को सहने की क्षमता को देखा जाता है। दर्द बढऩे की स्थिति में उसके रूटीन को बदला जाता है।
इच्छा शक्ति : परफेक्ट खिलाड़ी बनने के लिए इच्छा शक्ति का होना बेहद जरूरी है।
बॉडी कंपोजिशन : इसमें शरीर लचीला बनाने के लिए लंबाई व वजन पर फोकस करते हैं।
को-ऑर्डिनेटिव एबिलिटी : जिम्नास्टिक्स एक्टिविटीज को ग्रुप में कैसे दूसरे खिलाड़ी के साथ सामंजस्य बिठाना चाहिए, इसके लिए लगातार प्रैक्टिस कराई जाती है।
महिला खिलाड़ी
बैलेंसिंग बीम : इसमें खिलाड़ी को एक पाइपनुमा उपकरण पर चलाया जाता है।
अन-ईवन बार : खिलाड़ी छोटे-बड़े रॉड की ऊंचाई को पार कर आगे बढ़ते हैं।
वॉल्टेन टेबल : कलाबाजी करते हुए टेबल पार करते हैं।
फ्लोर एक्सरसाइज : पुशअप व क्रंचेस।
पुरुष खिलाड़ी
रोमन रिंग : दो रिंग को हाथों से पकड़कर बॉडी को मूव कराते हैं।
हॉरिजोन्टल बार : ऊंचाई पर लगे रॉड की मदद से बॉडी को ३६० डिग्री पर घुमाते हैं।
पैरेलल बार : दो रॉड के बीच हाथों के बल बॉडी को घुमाया जाता है।
पॉमेल हॉर्स : हाथों के सहारे बॉडी घुमाते हैं।

तीन तरह का होता है जिम्नास्टिक्स
बेसिक जिम्नास्टिक
इसके तहत स्कूली बच्चों को शरीर को मजबूत बनाने के लिए जॉगिंग, रनिंग, बेंडिंग और स्ट्रेचिंग कराई जाती हैं।
स्पोर्टिव या कॉम्पिटेटिव जिम्नास्टिक
यह खिलाडिय़ों के लिए होती है। यह पांच प्रकार का होता है।
आर्टिस्टिक : पुरुष और महिला के लिए अलग अप्रेटस हैं। इसमें फ्लोर एक्सरसाइज, पॉमेल हॉर्स, स्टिल रिंग्स, वॉल्ट व पैरेलल, हॉरिजॉन्टल, अन-ईवन बार्स और बैलेंस बीम शामिल हैं।
रिद्मिक : यह महिला खिलाडिय़ों के लिए होता है। रस्सी, रिबन, हूप और बॉल इसका हिस्सा होते हैं।
ट्रैम्पोलिंग : इसमें अप्रेटस की मदद से खिलाड़ी जंप करते हैं। इस दौरान उन्हें हवा में कलाबाजियां दिखानी होती है।
ऑक्जिलरी जिम्नास्टिक्स
यह सामान्य लोग और मरीजों को फिट रखने के लिए कराते हैं।
मीना शर्मा, जिम्नास्ट कोच