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लिवर के रोगों को दूर करती होम्योपैथी दवा

लिवर शरीर के प्रमुख अंगों में से एक है। यह एक प्रकार की ग्रंथि है जो मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखती है। पाचनक्रिया में भी यह अंग मददगार है जो बाइल...

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Mukesh Kumar Sharma

Jul 19, 2018

homeopathic

homeopathic

लिवर शरीर के प्रमुख अंगों में से एक है। यह एक प्रकार की ग्रंथि है जो मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखती है। पाचनक्रिया में भी यह अंग मददगार है जो बाइल का निर्माण करता है। इस अंग के खराब होने से हेपेटाइटिस, पीलिया और अन्य लिवर संबंधी दिक्कतों की आशंका बढ़ जाती है। जानिए लिवर से जुड़े रोग व उनके होम्योपैथिक उपचार के बारे में-

हेपेटाइटिस

कारण: वायरल-बैक्टीरियल इंफेक्शन इसकी मुख्य वजह है। ऐसे में विषैले तत्त्व शरीर से बाहर निकलने की बजाय रक्त में मिल जाते हैं।
लक्षण : भूख न लगने, बुखार, जोड़ व मांसपेशियों में दर्द व उल्टी आने जैसी समस्या होती है। इसके अलावा मरीज को सर्दी सहन न होना, भोजन के १-२ घंटे बाद ही खट्टी डकारों के साथ खाना ऊपर आना और मोशन के बाद थकान व कमजोर महसूस होती है।
इलाज : फास्फोरस दवा दी जाती है।

अल्कोहॉलिक लिवर डिजीज

कारण: फैटी लिवर, सिरोसिस या अल्कोहॉलिक लिवर डिजीज के लिए अधिक शराब पीना जिम्मेदार है।
लक्षण : पीलिया के लक्षणों के अलावा त्वचा पर खुजली होने, सर्दी सहन न होने और मरीज का स्वभाव गुस्सैल व अकेले रहना पसंद करना होता है। इन मरीजों में बचपन से कब्ज की दिक्कत और मसालेदार भोजन खाने व कॉफी पीने की इच्छा बनी रहती है।
इलाज : नक्सवोमिका और मर्कसोल दवा देते हैं।

ड्रग इंड्यूस्ड

कारण: बिना डॉक्टरी सलाह के अनियंत्रित रूप से दवा लेना लिवर की कार्यप्रणाली धीरे-धीरे बिगाड़ देता है। इससे दवाएं बेअसर होकर दुष्प्रभाव छोड़ती है जिससे संक्रमण हो सकता है। लक्षण : कमजोरी के साथ पेट के निचले भाग में दर्द। अधिक वजन वाले ऐसे मरीज जो हर काम को धीरे करते हंै। इसके अलावा दूध से एलर्जी व चॉक व पेंसिल खाने की इच्छा होने और मरीज को सिर पर ज्यादा पसीना आने की परेशानी रहती है।
इलाज : कैल्केरिया कार्ब, नक्सवोमिका व सीपिया दवा देते हैं।

पीलिया

कारण: लिवर बिलुरूबिन बाहर निकालता है। इस रोग में बिलुरूबिन का स्तर बढऩे से यह रक्त में मिल जाता है और शरीर की रंगत में पीलापन आ जाता है। वायरल हैपेटाइटिस से यह रोग होता है।
लक्षण : पेट व पैरों में सूजन, थकान, शरीर पर पीलापन, अधिक रक्तस्त्राव, सफेद मल और गहरे रंग का यूरिन आना, पीलिया होने पर आंखें, नाखून व त्वचा पर पीलापन और त्वचा पर खुजली होना।
इलाज : लाइकोपोडियम और नेट्रम फॉस दवा दी जाती है।