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5 एक्टिविटीज से बढ़ाएं शरीर में ‘हैप्पी हार्मोन्स का लेवल, बहुत आसान है तरीका

Increase the level of happy hormones in the body: प्रसन्नता जीवन को बेहतर बनाने की एक प्रक्रिया के समान है। यह व्यक्ति को न केवल सकारात्मकता की ओर लेकर जाती है, बल्कि उसे रोगों से भी दूर रखती है। वल्र्ड हैप्पीनेस डे (20 मार्च) के मौके पर जानिए कैसे यह रोगों से बचाती है।

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जयपुर

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Jyoti Kumar

Aug 07, 2023

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Increase the level of happy hormones in the body: प्रसन्नता जीवन को बेहतर बनाने की एक प्रक्रिया के समान है। यह व्यक्ति को न केवल सकारात्मकता की ओर लेकर जाती है, बल्कि उसे रोगों से भी दूर रखती है। वल्र्ड हैप्पीनेस डे (20 मार्च) के मौके पर जानिए कैसे यह रोगों से बचाती है।

प्रसन्नता (हैप्पीनेस) आरोग्य जीवनशैली का मूल हिस्सा है। यह रोगियों को राहत देने तक में एक प्रभावी तरीका है। कई रिसर्च में यह प्रमाणित हो चुका है कि खरीदी गई चीजों के मुकाबले अंदरूनी तौर पर स्थापित खुशी कहीं ज्यादा मायने रखती है। यह रोगों में औषधि की तरह है।

सकारात्मक चिंतन
तरीका एवं माहौल मिलकर शरीर में हार्मोन्स का स्राव निर्धारित करते हैं। पॉजिटिव चिंतन से सेरिटोनिन और डोपामाइन जैसे हैप्पी हार्मोन्स के स्राव में बढ़ोतरी होती है। इससे मन की स्थिति बेहतर होती है। अंदर से खुशी मिलती है।

इन तरीकों से बढ़ाएं खुशियां

कुछ एक्टिविटीज अपनाकर भी खुश रहा जा सकता है। यह कई रिसर्च में सामने आ चुका है कि पसंदीदा एक्टिविटी का मानसिकता पर प्रभाव पड़ता है।

1. तीन अच्छी बातें
दिनभर में आपने जो भी काम किए हैं, उनमें से तीन अच्छी बातें नोट करें। यह अभ्यास आपको रूटीन लाइफ में अंदरूनी खुशी देगा।

2. वॉलंटियर बनें
परिवार या सोसाइटी में आपको जो भी चीजें परेशान करती हैं, उनमें बदलाव लाने के लिए वॉलंटियर बनें। कुछ न कुछ समाज सेवा जैसा काम करें।

3. डोनेशन की खुशी
दान करना हमेशा से ही सेल्फ-हैप्पीनेस के मामले में टॉप पर रहा है। अत: समाज में गरीबों या वंचितों को डोनेशन देकर प्रसन्न रहें।

4. खुद मजबूत बनें
फिजिकल, सोशल, स्पोर्टिंग या कोई अन्य पसंदीदा स्किल आपकी मजबूती बन सकती है। दिन का कुछ समय इन्हें दे सकते हैं।

5. जीवन का लक्ष्य तय करें

क्वालिटी में सुधार करें। व्यक्तिगत जरूरतों व मूल्यों के अनुरूप जटिल माहौल का प्रबंधन करने की क्षमता विकसित करें। सार्थक लक्ष्यों की खोज करें व जीवन का उद्देश्य तय करें। विचार व क्रिया में स्व-अनुशासन लाएं।

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