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‘कार्डिएक अरेस्ट’ मतलब अचानक मौत का खतरा

यह अक्सर बिना किसी चेतावनी के होता है और ऐसे में मरीज का बच पाना मुख्य रूप से समय पर उपचार मिलने पर निर्भर करता है।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Apr 13, 2019

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यह अक्सर बिना किसी चेतावनी के होता है और ऐसे में मरीज का बच पाना मुख्य रूप से समय पर उपचार मिलने पर निर्भर करता है।

धड़कनें अनियमित होने से जब हृदय मस्तिष्क व शरीर के अन्य महत्त्वपूर्ण अंगों में रक्तापूर्ति नहीं कर पाता तो इसे सडन कार्डिएक अरेस्ट (एससीए) कहते हैं। यह अक्सर बिना किसी चेतावनी के होता है और ऐसे में मरीज का बच पाना मुख्य रूप से समय पर उपचार मिलने पर निर्भर करता है।

हार्टअटैक से अलग है एससीए -
कई बार लोग इसे गलती से 'मैसिव हार्ट अटैक' समझ लेते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। जब हृदय से जुड़ी धमनी में ब्लॉकेज के कारण खून हृदय तक नहीं पहुंचता है तो वह हृदयघात की स्थिति होती है लेकिन एससीए हृदय की धड़कन अनियमित होने से होता है। यह एक ऐसी आपात स्थिति है जिसमें कुछ ही मिनट में मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो सकता है और व्यक्तिकी मौत भी हो सकती है। कुछ मामलों में हार्ट अटैक के कारण सडन कार्डिएक अरेस्ट हो सकता है।

प्रमुख लक्षण -
अचानक बेहोश हो जाना।
कंधे पर थपथपाने का असर न होना।
सांस लेने में दिक्कत।
नब्ज और रक्तचाप का खत्म हो जाना यानी बीपी लेस पल्स।

इन्हें है जोखिम -
जिनके परिवार मे किसी को कम उम्र पर हृदय की बीमारी, हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट की समस्या हुई हो।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण हृदय की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने से धड़कनों में अनियमितता हो।
धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, अधिक कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और शराब की लत।
हृदय की पंपिंग में अवरोध।

उपकरण करेगा अलर्ट -
विशेषज्ञ इसमें इंप्लांटेबल कार्डियोवर्टर डीफिब्रिलेटर (आईसीडी) के प्रयोग की सलाह देते हैं। यह कार्डिएक अरेस्ट के जोखिम वाले लोगों के बचाव के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक छोटा उपकरण है जिसे हृदय के आसपास की त्वचा के नीचे लगाया जाता है। यह हृदय की धड़कन की निरंतर निगरानी रखकर अलर्ट करता है।