जानिए डायबिटीज से जुड़े भ्रम और इनकी सच्चाई

जानिए डायबिटीज से जुड़े भ्रम और इनकी सच्चाई
डायबिटीज पूरी तरह से लाइफस्टाइल बीमारी बन गई है। इसके 3 प्रकार हैं- टाइप 1, टाइप 2 व जेस्टेशनल।

Vikas Gupta | Updated: 04 Oct 2019, 04:27:47 PM (IST) तन-मन

डायबिटीज पूरी तरह से लाइफस्टाइल बीमारी बन गई है। इसके 3 प्रकार हैं- टाइप 1, टाइप 2 व जेस्टेशनल।

टाइप-1 - डायबिटीज में पेन्क्रियाज इंसुलिन नहीं बना पाता जिससे शरीर में ग्लूकोज की कमी होने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। यह आमतौर पर जेनेटिक होता है लेकिन अन्य कारणों से भी यह बीमारी हो सकती है।

टाइप-2, जेस्टेशनल-
इसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाने के साथ इसका प्रयोग भी नहीं कर पाता। वहीं प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोन में बदलाव से जेस्टेशनल मधुमेह की आशंका रहती है जो प्रसव के बाद ठीक हो जाती है।

भ्रम: लक्षण नहीं दिखना यानी कि व्यक्ति फिट है।
तथ्य: हकीकत में एक चौथाई लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें मधुमेह है। कई बार लोग 10 साल तक भी प्री-डायबिटिक स्टेज पर होते हैं जिसमें ब्लड ग्लूकोज का स्तर बॉर्डरलाइन पर होता है। यह स्थिति भी सेहत के लिए हानिकारक होती है। इस दौरान कोई लक्षण नहीं दिखते हैं लेकिन अंदर ही अंदर नुकसान होता रहता है। ऐसे में सभी को समय पर ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए।

भ्रम: ज्यादा शुगर का प्रयोग ही मधुमेह का कारण होता है।
तथ्य: ज्यादा शुगर सभी के लिए हानिकारक होती है। जबकि डायबिटीज जेनेटिक, खराब जीवनशैली व पर्यावरण संबंधी कई कारणों से होती है। शुगर फैट वाली चीजों जैसे कुकीज, आइसक्रीम, मिठाइयां आदि में होता है। ज्यादा मात्रा में फैट-शुगर की चीजें खाने से वजन बढ़ता है जो मधुमेह का अप्रत्यक्ष कारण है।

भ्रम: स्लिम लोगों को रोग की आशंका कम होती है।
तथ्य: अधिक वजन डायबिटीज का एक कारण है। लेकिन दुबले लोगों को भी इस रोग की आशंका रहती है। खराब जीवनशैली व खानपान और पेन्क्रियाज के ठीक से काम न करने से भी यह रोग हो सकता है। इसलिए सतर्क रहें।

भ्रम: कड़वी चीजों से ब्लड शुगर का स्तर रहता कंट्रोल।
तथ्य: कार्बोहाइड्रेट से युक्त चीजें (केवल मीठी ही नहीं) ग्लूकोज की मात्रा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में नीम, करेला जैसी कड़वी चीजों में भी कार्बोहाइड्रेट की मात्रा होती हैं जो ब्लड शुगर के स्तर को बिगाड़ती हैं।

भ्रम : डायबिटीज के रोगी को फल नहीं खाने चाहिए।
तथ्य: फाइबर और फ्रक्टोज शुगर के कारण फलों को दिन में सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। फलों में फाइबर तत्त्व होने से फ्रक्टोज बहुत धीरे से ब्लड में रिलीज होता है। ऐसे में हमारा शरीर बिना इंसुलिन के फ्रक्टोज को आसानी से इस्तेमाल कर सकता है। केला, चीकू, आम, अंगूर, गन्ना, शरीफा जैसे फल जिनमें फाइबर की कमी होती है, को खाने से बचना ही चाहिए।

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