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बेड रेस्ट के दौरान हल्का-फुल्का मूवमेंट है जरूरी

फ्रैक्चर, सर्जरी या किसी गंभीर संक्रामक रोग की अवस्था में अक्सर डॉक्टर पूरा बेड रेस्ट करने की सलाह देते हैं

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बेड रेस्ट के दौरान हल्का-फुल्का मूवमेंट है जरूरी

फ्रैक्चर, सर्जरी या किसी गंभीर संक्रामक रोग की अवस्था में अक्सर डॉक्टर पूरा बेड रेस्ट करने की सलाह देते हैं। घर में हैं या हॉस्पिटल में कभी कभार यह रेस्ट कष्टदायक हो जाता है। कोई बड़ी सर्जरी, गर्भावस्था, कमरदर्द आदि में आराम करने के कारण एक्सरसाइज न के बराबर हो पाती है। जिससे दिक्कत और बढ़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में आराम कब और कितना करना है इसके बारे में जानकारी होना जरूरी है। जानें आमतौर पर इस दौरान होने वाली दिक्कतों के बारे में -

ये समस्याएं
आमतौर पर भोजन को पचने में तीन घंटे लगते हैं। लेकिन सारा दिन सिर्फ रेस्ट करने पर पाचनक्रिया प्रभावित होकर धीमी हो जाती है। जो अधिक वजन का भी कारण बन सकती है।

ये करें: ऐसे में किसी की मदद से थोड़ी देर चलने-फिरने की कोशिश करें।


- बेड रेस्ट के दौरान अकेलापन बढ़ने से तनाव का स्तर भी बढ़ता है। ऐसे में जरूरी है कि आराम करने के साथ खुद को थोड़ा बिजी रखें।

ये करें: टीवी व मैग्जीन के अलावा किसी अपने से बात करके भी तनाव दूर कर सकते हैं।

- लंबे समय तक लेटे व बैठे रहने से खुद को फिट रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। साथ ही मांसपेशियों के अलावा कई प्रमुख अंगों में अकड़न व दर्द की समस्या बढ़ जाती है।

ये करें: कमर, कूल्हे या पैरों में फ्रैक्चर के दौरान पैरों की अंगुलियों को हिलाते रहें ताकि रक्तसंचार दुरुस्त रहे।

- प्रेग्नेंसी या अबॉर्शन की स्थिति में बेड रेस्ट पर हैं तो शारीरिक सक्रियता कम होने लगती है।
ये करें: पैरों की अंगुलियों को हिलाते रहें साथ ही थोड़ी-थोड़ी देर में करवट बदलते रहें।

- बेड रेस्ट की स्थिति बच्चों के लिए काफी तकलीफ देने वाली होती है।
ये करें: रोचक कहानियां सुनाएं, टीवी देखने दें या कुछ पढ़ने को दें।

सावधानी बरतें
जरूरत होने पर ही मोबाइल, टेबलेट व लैपटॉप का प्रयोग करें। खानपान में नमक, घी, तेल व अधिक मीठी चीजें खाने से बचें।