
ayurveda
आयुर्वेद के अनुसार लगातार खराब दिनचर्या और खानपान में गड़बड़ी के कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है जिससे आगे चलकर कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। आयुर्वेद में कैंसर की पहली और दूसरी स्टेज का इलाज पूरी तरह से संभव है।
लेकिन ज्यादातर लोग जब एलोपैथी से पूरी तरह निराश हो जाते हैं तो वे इस पद्धति में इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में रोगी का मर्ज तो पूरी तरह से ठीकनहीं हो पाता लेकिन लाइफस्टाइल सुधारकर जीने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
आयुर्वेदिक इलाज
इस चिकित्सा में सबसे पहले मरीज को दिनचर्या सुधारने के लिए कहा जाता है। जैसे जल्दी सोना और समय से उठना।
डाइट में सुधार
कैंसर के मरीज को एसिडिक डाइट जैसे अचार, पुड़ी-परांठें, खटाई और तली-भुनी चीजों से परहेज करना होता है। उन्हें अपक्व (बिना पका) या उबला हुआ आहार लेने के लिए कहा जाता है। कैंसर से बचने और इस रोग में सुधार के लिए ये चीजें काफी फायदेमंद होती हैं।
ज्वारे का रस : इसे सुबह व शाम 100 ग्राम की मात्रा में पीने से लाभ होता है।
अंकुरित गेहूं : इसमें विटामिन बी-12 होता है जो पाचनतंत्र को मजबूत करके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। एक कटोरी अंकुरित गेहूं रोजाना खा सकते हैं।
गिलोय का रस : इसके रस या पाउडर में शहद मिलाकर लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे कैंसर का खतरा कम होता है और यह इस रोग के इलाज में भी उपयोगी है। यह प्रयोग नीम व हरसिंगार के साथ भी किया जा सकता है।
टमाटर : उबालकर इसका सूप बना लें या इसके पानी को पी लें और टमाटर को ऐसे ही खा लें। यह प्रयोग भी एंटी कैंसर का काम करता है।
व्यायाम : कैंसर के रोगी आमतौर पर कमजोरी के कारण व्यायाम नहीं कर पाते इसलिए उन्हें सुबह- शाम 10 मिनट की ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए जैसे अनुलोम-विलोम और दीर्घश्वसन।
Published on:
21 Mar 2018 05:00 am
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