
पंचगव्य यानी गोदुग्ध (दूध), गोदधि (दही), गोघृत (घी), गोमूत्र (मूत्र) और गोमेह (गोबर) से कई रोगों के इलाज के बारे में कारगर बताया है।
गाय को हर रोग का उपचार करने में सक्षम माना है। चरक संहिता में पंचगव्य यानी गोदुग्ध (दूध), गोदधि (दही), गोघृत (घी), गोमूत्र (मूत्र) और गोमेह (गोबर) से कई रोगों के इलाज के बारे में कारगर बताया है। वहीं गोबर व गोमूत्र शरीर के शुद्धीकरण के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार इन सभी चीजों में प्रचुर मात्रा में विटामिन-ए, बी12, सी, डी, पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस और एंटीबैक्टीरियल व एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं। इनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है साथ ही ये दिमाग के लिए फायदेमंद है। खुजली, दाद, पेटदर्द, कब्ज, अपच और बवासीर आदि रोगों के इलाज में भी मददगार हैं।
बनाने की विधि-
गाय का दूध – 2 लीटर
गाय के दूध का दही- 2 किलो
गौ-मूत्र– 3 लीटर
गाय का घी- आधा किलो
ताजा गोबर गाय का- 5 किलो
गन्ने का रस – 3 लीटर
नारियल का पानी- 3 लीटर
पके केले – 12 आदिय़
पंचगव्य बनाने का तरीका -
पंचगव्य को मिट्टी कंक्रीट या प्लास्टिक से बने किसी बड़े वर्तन में तैयार किया जाना चाहिए। कंटेनर में गाय का गोबर और घी का मिश्रण डालना चाहिए। फिर उस मिश्रण को दिन मे 2 बार 3 दिन हिलाते रहना चाहिए। चौथे दिन कंटनेर मे शेष सामग्री मिलातकर फिर अगले 15 दिनों तक दिन मे 2 बार मिश्रित करते रहें। इसके बाद उन्नीसवे दिन पंचगव्य मिश्रण उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।
Published on:
11 Apr 2019 03:49 pm
बड़ी खबरें
View Allबॉडी एंड सॉल
स्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
