
Sitting
फ्लाइट या कार से लंबी दूरी का सफर करने वालों को बीच-बीच में थोड़ा आराम करना चाहिए वर्ना ज्यादा देर तक बैठे रहने से डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी डीवीटी का खतरा हो सकता है।
क्या है डीप वेन थ्रोम्बोसिस
पैरों में दो तरह की नसें होती हैं। इनमें त्वचा के पास यानी ऊपरी सतह वाली नसें व गहराई वाली नसें (डीप वेंस) हैं। डीप वेंस दूषित रक्त को फेफड़ों और हृदय तक पहुंचाती हैं ताकि वहां से साफ रक्त अन्य हिस्सों तक जा सके और शरीर को ऊर्जा मिले। डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी डीवीटी में पैरों की डीप वेंस में ब्लड क्लॉटिंग (खून के थक्के) हो जाती है जिससे दूषित रक्त वापस हृदय व फेफड़ों तक नहीं पहुंचता और पैरों में ही रुक जाता है परिणामस्वरूप इससे सूजन व दर्द होने लगता है।
डीवीटी का खतरा
डीवीटी के लगभग १० फीसदी मरीजों की नसों में बनने वाली क्लॉटिंग का फेफड़ों में जाकर फंसने का खतरा रहता है इसे पल्मोनरी एम्बोजिल्म कहते हैं। इससे फेफड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलाती और मरीज की जान को खतरा बढऩे लगता है।
बच्चों को समस्या
डीवीटी 1000 वयस्कों में से एक को होती है। कभी-कभी आनुवांशिक कारणों की वजह से भी यह तकलीफ हो सकती है। कुछ मामलों में यह समस्या हाथों को भी प्रभावित करती है।
लक्षणों को पहचानें
हाथ : सूजन व दर्द।
पैर: कमर से नीचे पूरे पैर में सूजन और दर्द की समस्या।
कभी-कभार पैरों में सनसनाहट या सुन्नता भी हो सकती है।
बचाव है जरूरी
डीप वेन थ्रोम्बोसिस से बचने के लिए रोजाना कम से कम २० मिनट टहलना फायदेमंद है। इससे ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है।
लंबी दूरी की फ्लाइट हो तो २-२ घंटे के अंतराल में बॉडी को थोड़ा रिलेक्स करें। जिनका वजन अधिक है वे विंडो सीट पर बैठने से बचें।
वजन नियंत्रित रखें और धूम्रपान न करें।
घर में किसी सदस्य को पहले से डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या हो तो खूब पानी पिएं। शरीर में पानी की मात्रा कम होने से रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है। ऐसे में खून के जमने का खतरा बढ़ जाता है।
ये हैं वजह
देर तक बैठ रहने से (लंबी दूरी की फ्लाइट या कार से सफर)।
२-३ घंटे की सर्जरी के दौरान।
सभी प्रकार के कैंसर।
प्रोटीन-सी एंजाइम की कमी (इसकी कमी से रक्त जम जाता है)।
आनुवांशिक कारण।
अल्ट्रासाउंड से जांच
पैरों में सूजन कई रोगों के कारण भी हो सकती है। ऐसे में ब्लड क्लॉटिंग का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड से जांच की जाती है।
दवा से इलाज
हृदय रोग में रक्त पतला करने वाली दवा से इस रोग का इलाज होता है। इसमें मरीज को दवा खिलाने की बजाय वैस्क्यूलर सर्जन अल्ट्रासाउंड मशीन से क्लॉटिंग वाले स्थान पर दवा इंजेक्ट करते हैं और मरीज को तुरंत राहत मिल जाती है।
Published on:
16 Mar 2018 05:16 am
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