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मौसम बदल रहा है जरा एलर्जी से भी बचें

यह समय मौसम की अंगड़ाई का है। दिन में गर्मी और रात में थोड़ी सर्दी। तापमान परिवर्तन के इसी समय शरीर में रोग घर कर लेते हैं।

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एलर्जी

यह समय मौसम की अंगड़ाई का है। दिन में गर्मी और रात में थोड़ी सर्दी। तापमान परिवर्तन के इसी समय शरीर में रोग घर कर लेते हैं। खासतौर से एलर्जी इस मौसम की आम समस्या है। ईएनटी (ईयर, नोज एंड थ्रोट) का संक्रमण किसी भी समय और किसी भी आयु वर्ग में हो सकता है। सामान्यतया मौसम बदलने के साथ ही सिरदर्द, बुखार और कुछ भी निगलने में परेशानी कान में इंफेक्शन आम है।

खानपान पर रखें ध्यान
मौसम बदलता है तो हवा परिवर्तित होती है। इसी समय आंखों में जलन, खुजली आदि रोग भी हो जाते हैं। इस मौसम में विशेष सावधानी रखी जानी जरूरी है। दिन में तेज गर्मी की अनुभूति पर राते ठंडी। खान-पान में बदलाव हो जाता है और अचानक फ्रीज का ठंडा पानी पी लेने जैसी गलतियां आम तौर पर घरों में हो जाती है। ऐसे में शरीर के सर्वाधिक संवेदनशील अंग गले और नाक पर ही इसका ज्यादा असर होता है। बचाव के लिए जरुरी है कि अचानक से खान-पान नहीं बदला जाए। ठंडी चीजें एकदम से प्रयोग में न ली जाए। रात्रि में या सुबह जल्दी कहीं निकले तो पर्याप्त कपड़े पहनकर निकलें। हां, पानी ज्यादा से ज्यादा पीना चाहिए।

फल-सब्जियों का भरपूर सेवन
तैराकी यदि कोई करता है तो इस समय में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। तैराकी के दौरान कान को और आंख को संक्रमण से बचाने के लिए कान में ईयर प्लग और चश्मा लगाकर ही तैराकी कीजिए। गले में यदि खराश हो तो हल्के गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारा कीजिए। इससे फायदा होता है। किसी की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है तो लोगों के संपर्क में आने से बचने की कोशिश करनी चाहिए। दैनिक भोजन के अंतर्गत फलों और सब्जियों का ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए।

नहीं रहे शरीर में पानी की कमी
इस मौसम में डेंगू, स्वाइन फ्लू भी आम बात है। शरीर में पानी की कमी से और भी रोग होने की संभावना निरंतर बनी रहती है। डिहाइड्रेशन न हो इसके लिए पानी की मात्रा बढ़ा दें। पानी से शरीर के सारे वायरस ठीक हो जाते हैं। कोई इन्फेशन हो जाए तो अचानक से खाना-पीना नहीं छोडऩा चाहिए। सुबह ब्रेक फास्ट आवश्यक रूप से करें। मॉर्निंग वॉक पर जाते हैं और एलर्जी की समस्या है तो मास्क लगाकर जाएं। इस समय पेड़-पौधों में भी तेजी से परिवर्तन होता है।

बीमारी हो तो घबराएं नहीं
जुकाम, नाक से पानी बहने और गले की खरास जैसी बीमारी हो तो घबराएं नहीं। एलर्जी को रोकने की दवाएं लें। एलर्जी की दवाओं का साइड इफेक्ट इतना नहीं होता परन्तु लगातार यह रहती है तो शरीर में इम्यूनिटी पावर कम होने लगता है। नाक बहती है तो स्प्रे फ्लूरिकाजोन नेजल स्प्रे का इस्तेमाल करें। टेबलेट के रूप में फ्रेक्सोफेनारिया ली जा सकती है। आंख जलने और नाक बहने की समस्या हो तो फ्लूरिका प्रभावकारी दवा है।

इनसे बचें, दवा लें
मौसम बदलने के साथ सांस लेने में तकलीफ भी प्राय: हो जाती है। याद रखें, नाक-गला और छाती यूनिफाइड एयर वे है। हमने अपनी सुविधा के लिए इन्हें अलग-अलग विभाजित कर रखा है। मौसम बदलने के साथ ही इन पर सीधा असर होता है। धूल के कणों, घरों में इधर-उधर जमा मिट्टी, पलंग की चद्दर, सोफासेट आदि में जमा धूल आदि में कीड़ा होता है जिसे डस्ट माइट कहा जाता है। एलर्जी इसी से फैलती है। एलर्जी में कोमन दवा है- फ्लूरिका।

ना बरतें लापरवाही
एलर्जी लम्बे समय तक रहे तो इसका असर खतरनाक बीमारी के रूप में सामने आ सकता है। इसलिए ऐसा हो तो तुरंत इम्यूनोथेरेपी करवा लेनी चाहिए। इससे 300 से 500 तरह की एलर्जी कारणों की जांच हो सकती है। किसी भी तरह की एलर्जी हो तो उसे इंफेशन या दवाओं को देकर ठीक किया जा सकता है। जरूरी यह है कि समय पर एलर्जी का पता चल जाए कि वह किस कारण से हुई है। नाक के लिए एंडोस्कोप फेस, साइनस सर्जरी की जाती है।

कईं बार लम्बे समय से कई लोग एलर्जी को झेलते रहते हैं। इसमें रोग बढ़ जाता है। ऐसे में ऑपरेशन करके रोगी के साइनस खोलने पड़ते हैं। एलर्जी के लिए बहुत सी दवाएं है परन्तु सावधानी सबसे बड़ा उपाय है। शुद्ध हवा और पानी हर रोग का मर्ज है। जिससे एलर्जी हो उससे बचने का उपाय करें। समय-समय पर आबो-हवा परिवर्तन के लिए भी बाहर जा सकते हैं।