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वॉर्मअप से अकड़न होती है दूर, घटती है इंजरी रिस्क

स्पोट्र्स इंजरी का अर्थ खेल या व्यायाम के दौरान लगने वाली चोट से है। इस दौरान शरीर के किसी भी भाग में चोट लग सकती है, लेकिन स्पोट्र्स इंजरी का प्रयोग केवल उन्हीं चोटों के लिए किया जाता है, जिनमें मस्क्युलोस्केलेटल सिस्टम प्रभावित होता है। इसमें अधिकतर चोटें मसल्स या जॉइंट्स में ही होती हैं।

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जयपुर

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Jyoti Kumar

Jul 31, 2023

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Sports injury: स्पोट्र्स इंजरी का अर्थ खेल या व्यायाम के दौरान लगने वाली चोट से है। इस दौरान शरीर के किसी भी भाग में चोट लग सकती है, लेकिन स्पोट्र्स इंजरी का प्रयोग केवल उन्हीं चोटों के लिए किया जाता है, जिनमें मस्क्युलोस्केलेटल सिस्टम प्रभावित होता है। इसमें अधिकतर चोटें मसल्स या जॉइंट्स में ही होती हैं।

कॉमन स्पोट्र्स इंजरी
इसमें चोट के आधार पर उसे अलग-अलग तरीकों से जानते हैं। जानिए, ऐसी ही कुछ इंजरी के बारे में-
मोच: खेलने और व्यायाम के समय लिगामेंट्स के खिसक जाने से मोच आ सकती है। लिगामेंट्स वे टिश्यू गु्रप होते हैं, जो हड्डियों को आपस में जोड़ते हैं।
खिंचाव: शरीर के अंदर टेंडन्स टिश्यू के मोटे, रेशेदार तार होते हैं, जो हड्डी को मांसपेशियों से जोड़ते हैं। इनमें खिचांव ही स्ट्रेन है। कुछ लोग स्ट्रेन को मोच समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं।


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मांसपेशियों में सूजन: चोट लगने के कारण सूजन होना भी सामान्य है। सूजी हुई मांसपेशियां दर्दनाक और कमजोर हो सकती हैं, साथ ही जल्दी क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।


फ्रैक्चर: इसमें हेयरलाइन व कंप्लीट फै्रक्चर होता है। हेयरलाइन में हड्डी जुड़ी हुई और कम्प्लीट में अलग होती है।


डिस्लोकेशन: इसमें हड्डियां अपने जोड़ के स्थान से खिसक जाती हैं, इसे डिस्लोकेशन कहते हैं। इसमें दर्द-सूजन होता है, संबंधित हिस्से में कमजोरी आ जाती और रोटेटर कफ इंजरी भी होती है।

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इन चोटों के संभावित कारण
1. एक्यूट इंजरी : किसी घटना या एक्सीडेंट के कारण हो सकती है। जिसके कारण आप भी महसूस कर सकते हैं। जैसे स्लिप होना, गिर जाना, किसी चीज से टकराना आदि। इसका इलाज जल्दी हो जाता है।

2. क्रॉनिक इंजरी: यह लंबे समय तक रहती है। इसकी शुरुआत एक्यूट इंजरी से होती है, लेकिन किन्हीं कारणों से यह पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाती है। इसलिए क्रॉनिक में बदल जाती है।

सूजन या कमजोरी होने पर विशेषज्ञ को दिखाएं

तेज दर्द, ज्यादा सूजन, कोई गांठ या संबंधित हिस्से में कमजोरी या वजन से दिक्कत होती है तो तत्काल विशेषज्ञ को दिखाएं, यह इमरजेंसी की स्थिति है। इसमें ओवर द काउंटर दवाइयां लेने से बचें। इंजरी दो सप्ताह तक ठीक न हो तो फिजियोथैरेपी या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

इनका भी रखें ध्यान
चोट वाली जगह पर अधिक दबाव न डालें। कुछ दिन आराम करें।
आइस लगाने से सूजन-जलन कम होती है। दर्द में भी आराम मिलता है।
चोट वाली जगह को ऊं चा रखने से सूजन, जलन और दर्द कम करने में भी मदद मिल सकती है।
अगर इस तरीके से आराम न मिल रहा हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें, क्योंकि इसमें सही उपचार जरूरी है।

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इलाज और बचाव
स्पोट्र्स इंजरी में गंभीरता के आधार पर इलाज होता है। हल्की चोट में आराम और फिजियो की जरूरत होती है, जबकि गंभीर होने पर सर्जरी की जाती है। जिन्हें ऐसी समस्या ज्यादा होती है, वे पहले अपने शरीर की क्षमता की जांच भी करवा सकते हैं। आधुनिक सुविधाओं के चलते पहले से शरीर की पूर्ण जांच सुविधा उपलब्ध है। इन कमियों को दूर भी किया जा सकता है।

स्पोट्र्स इंजरी से कैसे करें बचाव
व्यायाम या खेल से पहले एक फिटनेस प्लान तैयार करें। केवल एक ही व्यायाम न करें। सबको थोड़ा-थोड़ा समय दें।
व्यायाम और स्पोट्र्स से पहले हमारा शरीर ठंडा रहता है। इससे अंगों में अकडऩ होती है। इसलिए हल्के व्यायाम से वॉर्मअप की सलाह दी जाती है।
शरीर में पानी की कमी न होने दें। इससे शरीर में लचीलापन बढ़ता है।


व्यायाम से पहले स्ट्रेचिंग से मांसपेशियों की क्षमता में बढ़ती और चोट का जोखिम कम होता है, जूते सही पहनें।
व्यायाम या खेल के सही नियम की जानकारी न होने से भी इंजरी की आशंका रहती है। जानकारी कर लें।
जब शरीर या किसी अंग में दर्द हो तो व्यायाम करने से बचें। इससे इंजरी की आशंका बढ़ती है। शरीर की क्षमता से ज्यादा व्यायाम न करें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।