
देश में असुरक्षित गर्भपात महिलाओं की असमय मृत्यु का एक प्रमुख कारण है।
देश में आज भी महिलाओं की एक बड़ी आबादी गर्भपात के अपने अधिकारों से अनजान हैं और वे असुरक्षित गर्भपात का सहारा लेती है, जो चिंता का विषय है। स्त्री रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में गर्भपात के 10 मामलों में से सिर्फ एक के बारे में सूचना दी जाती है। देश में असुरक्षित गर्भपात महिलाओं की असमय मृत्यु का एक प्रमुख कारण है।
गर्भपात पर प्रतिबंध लगाने से महिलाओं को गर्भावस्था समाप्त करने से नहीं रोका जा सकता है, जबकि इससे अनचाहे गर्भ को समाप्त करने के लिए खतरनाक उपायों का सहारा लेने का जोखिम बढ़ जाता है ।गर्भपात की उच्च दर की एक वजह यह है कि कई क्षेत्रों में अच्छे गर्भनिरोधक नहीं मिलते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अनियोजित गर्भावस्था की दर बढ़ जाती है।
गर्भपात की गोलियां प्रभावी और सुरक्षित हो सकती हैं, बशर्ते गोलियों का सही तरीके से उपयोग किया जाए। उपयोग की सही जानकारी नहीं होने पर महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसके हानिकारक प्रभाव होते हैं। केवल कुछ प्रतिशत महिलाओं के पास ही गर्भपात की दवा हो सकती है। जटिलताओं के मामले में इन गोलियों का उपयोग करने और गुणवत्ता स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करना अनिवार्य हो जाता है।
गर्भनिरोधक और गर्भपात पर शिक्षा और जागरूकता की जरूरत है। स्थिति का आकलन करना, सुरक्षित गर्भपात को एक वास्तविकता बनाना और देश भर में इसके लिए सुविधा उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। यह सुनिश्चित करने की भी जरूरत है कि समाज के सभी वर्गों की महिलाओं को सही जानकारी उपलब्ध हो।
भारत में गर्भपात एक अत्यधिक प्रतिबंधित प्रक्रिया है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (1971), एक पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा गर्भावस्था के 12 सप्ताह से पहले या दो पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के अनुमोदन से गर्भावस्था के 20 सप्ताह से पहले गर्भपात की इजाजत दी जाती है, लेकिन यह इजाजत तभी दी जाती है जब मां या बच्चे का मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य को खतरा न हो।
गर्भावस्था की समाप्ति शल्य चिकित्सा या चिकित्सकीय रूप से की जा सकती है। हालांकि चिंता वैसे चिकित्सीय गर्भपात की है, जो उन गोलियों को लेने से होती है जो या तो मौखिक रूप से निगली जाती हैं या वेजाइना में डाली जाती हैं। लिहाजा, सुरक्षित गर्भपात के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को दवाओं के गलत उपयोग से रोके जाने की जरूरत है।
Published on:
06 Apr 2019 12:48 pm
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