
महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज, पेशाब में जलन व पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या में लाभकारी है।
आयुर्वेद में पत्थरचट्टे के पौधे को किडनी स्टोन और प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़े रोगों के इलाज में उपयोगी माना गया है। इसे पर्णबीज भी कहते हैं।
विशेषता : इसके पत्ते को मिट्टी में गाड़ देने से ही यह उस स्थान पर उग जाता है। तासीर में सामान्य होने की वजह से इसका प्रयोग किसी भी मौसम में कर सकते हैं। इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।
औषधीय गुण : महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज, पेशाब में जलन व पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या में लाभकारी है। साथ ही इसके सेवन से 10-15 एमएम तक की पथरी पेशाब के जरिए बाहर निकल जाती है।
ऐसे करें प्रयोग -
इसके 4-5 पत्तों को पीसकर एक गिलास पानी में घोल बनाकर सुबह-शाम जूस के रूप में लगभग 1-2 माह तक पिएं। जूस के अलावा पत्तों को चबाकर व पकौड़े बनाकर भी खाया जा सकता है। स्वस्थ व्यक्ति भी यदि इसके पत्तों का सेवन नियमित रूप से करे तो वह कई परेशानियों से बच सकता है।
Published on:
28 Mar 2019 02:36 pm
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