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उपाय जिनसे कम होगा घुटनों का दर्द

कम उम्र के ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो घुटने के दर्द से पीडि़त हैं। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब लंबे समय तक ध्यान न देने से...

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Mukesh Kumar Sharma

May 30, 2018

knee pain

knee pain

कम उम्र के ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो घुटने के दर्द से पीडि़त हैं। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब लंबे समय तक ध्यान न देने से मामला सर्जरी तक पहुंच जाता है।

निवारण के घरेलू उपाय

ऐसे कामों से बचें जो दर्द बढ़ाते हैं, जैसे वजन उठाने वाले काम। दर्द वाली जगह दिन में कम से कम चार बार बर्फ का सेंक करें। सूजन को कम करने के लिए घुटने को क्षमतानुसार ऊपर उठाकर रखें। घुटनों के बीच में तकिया रखकर सोएं।

हड्डियां होती हैं कमजोर

धूप व विटामिन-डी की कमी और दूध न पीने से हड्डियां कमजोर होती हैं। यही नहीं धूम्रपान या तंबाकू की लत से फेफड़ों, हड्डियों व जोड़ों को नुकसान होता है।

क्या है पीएस-150 सर्जरी

घुटनों में दर्द से राहत के लिए पीएस-१५० सर्जरी उपलब्ध है। इससे प्रत्यारोपित घुटना प्राकृतिक घुटने की तरह काम करता है। अक्सर गठिया में कू्रसिएट लिगामेंट खराब हो जाते हैं और कैल्शियम डिपॉजिट होने से ऑस्टियोफाइट्स से घुटना पूरा नहीं मुड़ता। इस तकनीक में घुटना अपने विशिष्ट डिजाइन के कारण कू्रसिएट लिगामेंट की कार्यक्षमता पर निर्भर नहीं करता और पूरा मुड़ता है।


इसे प्रत्यारोपित करते समय रोटेटिंग प्लेटफॉर्म व हाइली पॉलिश्ड कोबाल्ट क्रोम ट्रे को इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे प्रत्यारोपित घुटने की घिसने की गति व मात्रा कम हो जाती है। सर्जरी के बाद पैर १50-155 डिग्री तक घूम सकता है इसलिए इसे पीएस-१५० सर्जरी कहते हैं।

क्रॉस कंसल्ट करें

घुटने के दर्द में फिजियोथैरेपिस्ट, फिटनेस ट्रेनर व योगगुरु की मदद से राहत मिलती है। दर्द असहनीय हो तो विशेषज्ञ से परामर्श लें। डॉक्टर यदि सर्जरी की सलाह दें तो क्रॉस कंसल्ट जरूर करें। वैसे घुटने के दर्द में घरेलू उपाय भी लाभकारी होते हैं।

दूध पीना जरूरी

माना जाता है कि व्यक्ति दिन में दो गिलास दूध पीता है इसलिए हड्डियों की बीमारी की आशंका कम होती है। लेकिन इन दिनों कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जब व्यक्ति दूध पर्याप्त मात्रा में पीता तो है मगर उसकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। लिहाजा ऐसे में गाय का दूध फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में पौष्टिक तत्त्व होते हैं।

एंटीबायोटिक से डायबिटीज का खतरा


कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार अधिक एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से टाइप-२ डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इस शोध में जिन लोगों को १५ वर्षों या उससे अधिक समय तक एंटीबायोटिक दवाएं लेने की सलाह दी गई उन्हें अन्य लोगों की तुलना में टाइप-२ डायबिटीज होने का खतरा ५३ प्रतिशत अधिक था।

इस अध्ययन के लिए लगभग दो लाख एेसे मरीजों को शामिल किया गया जो १५ सालों से भी अधिक समय से एंटीबायोटिक ले रहे थे और १३ लाख एेसे लोगों को भी इसका आधार बनाया गया जिन्हें डायबिटीज नहीं थी। स्टडी में डायबिटीज होने का रिस्क उन लोगों में अधिक पाया गया जिन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी गई थीं। यह शोध भारत के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यहां डायबिटीज के मरीज अधिक हैं।